सिंगरौली

सिंगरौली में शराब दुकानों की नीलामी से बढ़ा राजस्व

10 समूहों का टेंडर पूरा, दो बाकी

47 दुकानों को 12 समूहों में बांटकर हो रही टेंडर प्रक्रिया, दो समूहों की नीलामी 10 मार्च को होगी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
 सिंगरौली। जिले की शराब दुकानों के टेंडर की प्रक्रिया इस वर्ष प्रशासन के लिए लाभकारी साबित होती नजर आ रही है। जिले की कुल 47 शराब दुकानों को 12 समूहों में विभाजित कर टेंडर प्रक्रिया कराई जा रही है। प्रथम चरण में तीन बैच के माध्यम से टेंडर कराए गए, जिनमें अब तक 10 समूहों का टेंडर पूरा हो चुका है, जबकि दो समूहों का टेंडर होना अभी शेष है। मिली जानकारी के अनुसार शेष बचे मेढ़ौली ग्रुप और जयंत ग्रुप का टेंडर द्वितीय चरण में 10 मार्च को कराया जाएगा। संभवतः इसके बाद जिले की सभी शराब दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
25 प्रतिशत अधिक कीमत पर हुए टेंडर
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिन 10 समूहों का टेंडर हो चुका है, उनमें सरकार को आरक्षित मूल्य की तुलना में करीब 25 प्रतिशत अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है।बताया गया है कि इन 10 समूहों का कुल आरक्षित मूल्य 172 करोड़ 71 लाख 79 हजार 784 रुपये निर्धारित किया गया था, जबकि टेंडर प्रक्रिया के बाद इन्हें लगभग 216 करोड़ 72 लाख 62 हजार 78 रुपये में आवंटित किया गया है।
इस बार बदली गई समूह व्यवस्था
इस बार प्रशासन द्वारा कुछ स्थानों पर समूह व्यवस्था में बदलाव भी किया गया है। विभागीय जानकारी के अनुसार बैढ़न, बरगवां और जयंत क्षेत्र की पांच शराब दुकानों को मिलाकर एक समूह बनाया गया है।
इन कंपनियों और ठेकेदारों को मिले समूह
मिली जानकारी के अनुसार टेंडर प्रक्रिया में विभिन्न समूहों का आवंटन इस प्रकार हुआ है। ओम साई राम को बैढ़न ग्रुप और समदा-देवसर ग्रुप, गौरव सिंह को चितरंगी और निगरी ग्रुप, संजीव केसरी को परसौना ग्रुप, मोनार्क वाइन को बरगवां ग्रुप, सौरभ पांडे को चटका ग्रुप, विमल सिंह को नवानगर ग्रुप, कामधेनु एसोसिएट को विंध्यनगर ग्रुप, अष्टभुजा एसोसिएट को रजमिलान ग्रुप को मिला है।
बैढ़न ग्रुप आरक्षित मूल्य से 10% अधिक में आवंटित
सूत्रों के अनुसार बैढ़न ग्रुप का टेंडर आरक्षित मूल्य से लगभग 10 प्रतिशत अधिक कीमत पर आवंटित किया गया है। फिलहाल जिले में दो समूहों का टेंडर होना बाकी है। माना जा रहा है कि 10 मार्च को होने वाली प्रक्रिया के बाद पूरे जिले की शराब दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। टेंडर प्रक्रिया से सरकार को अपेक्षा से अधिक राजस्व मिलने के बाद आबकारी विभाग और प्रशासन भी संतुष्ट नजर आ रहा है।
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