गांवों से निकली युवा शक्ति ने लालकिले पर तिरंगे संग लहराया बागपत का परचम
अमन और नीतीश की भागीदारी से देश के 79वें स्वतंत्रता दिवस का समारोह राष्ट्रीय गौरव का वह उज्ज्वल अध्याय बन गया जिसमें बागपत की युवा शक्ति का नाम स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया।

बागपत। राष्ट्र की अस्मिता और आत्मगौरव के प्रतीक लालकिले की प्राचीर पर 79वें स्वतंत्रता दिवस का भव्य आयोजन इस वर्ष “नया भारत” की थीम पर आयोजित हुआ। यह अवसर न केवल स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानों को नमन करने का था, बल्कि विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने की दिशा में नवयुगीन संकल्पों की उद्घोषणा भी थी। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत के दो मेधावी युवा—अमन कुमार और नीतीश भारद्वाज।

ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रीय मंच तक पहुंचे अमन कुमार को यह गौरव रक्षा मंत्रालय की राष्ट्रीय प्रश्नोत्तरी में सवा दो लाख प्रतिभागियों के मध्य 26वीं रैंक अर्जित करने पर प्राप्त हुआ। राज्य युवा पुरस्कार से सम्मानित अमन के साथ माय भारत स्वयंसेवक नीतीश भारद्वाज को उनके मनोनीत सहचर के रूप में आमंत्रित किया गया। यह अवसर दोनों युवाओं के लिए जीवन की अमिट स्मृति और पूरे जनपद के लिए अप्रतिम गौरव का क्षण बन गया।
राष्ट्रगान की गूंज, 21 तोपों की सलामी और भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टरों से पुष्पवर्षा का दृश्य हर भारतीय को भावविभोर कर गया। इसी पावन क्षण का वर्णन करते हुए अमन और नीतीश ने कहा— “तिरंगे की छत्रछाया में खड़े होकर उसे सलामी देना और आकाश से पुष्पवर्षा का साक्षी बनना हमारे लिए जीवन का सर्वश्रेष्ठ अनुभव था। यह अनुभूति हमें सदैव राष्ट्रसेवा के पथ पर अग्रसर होने की प्रेरणा देती रहेगी।” 
इस वर्ष का केंद्रीय संदेश था “नया भारत”, जो विकसित भारत @2047 की संकल्पना का प्रतीक है। लालकिले के प्रांगण में 2,500 एनसीसी कैडेट्स और माय भारत स्वयंसेवकों ने सामूहिक रूप से नया भारत का लोगो बनाकर युवाशक्ति की ऊर्जा, सृजनशीलता और असीम संभावनाओं को उजागर किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज का युवा आत्मनिर्भरता, नवाचार और प्रौद्योगिकी में नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। उन्होंने विशेष रूप से आमंत्रित अतिथियों और माय भारत स्वयंसेवकों का उल्लेख करते हुए उन्हें “विकसित भारत निर्माण की प्रेरक शक्ति” करार दिया।
बागपत के इन युवाओं की राष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति ने जिले का मान बढ़ाया है। ग्रामीण अंचल से निकलकर लालकिले की प्राचीर तक पहुंचना यह सिद्ध करता है कि भारत का भविष्य गांवों की मिट्टी से उपजने वाली प्रतिभा के बल पर ही स्वर्णिम होगा। स्थानीय स्तर पर परिजनों और ग्रामीणों ने भी इस उपलब्धि को सामूहिक सम्मान बताते हुए कहा कि यह केवल दो युवाओं की नहीं, अपितु पूरे बागपत की सफलता है।
अमन कुमार और नीतीश भारद्वाज की उपलब्धि उन असंख्य युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े स्वप्न देखने का साहस रखते हैं। यह उपलब्धि इस तथ्य का साक्ष्य है कि परिश्रम, संकल्प और राष्ट्रभक्ति से परिपूर्ण युवा शक्ति ही भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में अग्रणी भूमिका निभाएगी।



