
फरीदाबाद/श्रीनगर । व्हाइट कॉलर आतंकी नेटवर्क का खतरनाक खेल का खुलासा हुआ है। छात्रों को भी बरगलाया गया। छात्र पाकिस्तान से काम कर रहे हैंडलरों के संपर्क में थे।
हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश में सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई में व्हाइट कॉलर आतंकी मॉड्यूल की खतरनाक साजिश का खुलासा हुआ है। यह आतंकी नेटवर्क लोगों को भड़काने, समन्वय करने, पैसा हस्तांतरित करने और लॉजिस्टिक्स के लिए कोड भाषा का इस्तेमाल कर रहा था।
यह पैसा पेशेवर और शैक्षणिक नेटवर्क के जरिये सामाजिक/धर्मार्थ कामों की आड़ में जुटाया जा रहा था। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बताया कि इस नेटवर्क में कट्टरपंथी पेशेवर और छात्र शामिल हैं, जो पाकिस्तान और दूसरे देशों से काम कर रहे विदेशी हैंडलरों के संपर्क में हैं।
संदिग्ध आतंकी गनई के पास से पुलिस को सिलिकन मास्क और विग भी मिले हैं। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो आरोपी भेष बदलकर या तो खुद कोई वारदात करने वाला था या फिर हैंडलर के भेजे जाने वाले किसी अन्य आरोपी को उसे ये सामान मुहैया कराना था।
ऐसे हुआ खुलासा…
19 अक्तूबर को कश्मीर के बूनपोरा नौगाम इलाके में जैश के कई पोस्टर चिपके मिले थे। इनमें सुरक्षाबलों को धमकी दी गई थी। इसके बाद, गैर-कानूनी गतिविधि (निरोधक) कानून (यूएपीए), बीएनएस, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया व जांच शुरू की गई। जांच में अंतरराज्यीय-अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क का खुलासा हुआ।
कई गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल
पुलिस के अनुसार, आरोपियों पर कई तरह की गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। इन्हें नए लोगों की पहचान कर उन्हें कट्टरपंथी बनाने, आतंकी गुटों में शामिल करने के अलावा फंड जुटाने, लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था करने, हथियार गोला-बारूद व आईईडी बनाने के लिए सामान खरीदने में शामिल पाया गया।
अधिकारियों ने दावा किया कि जब्त अमोनियम नाइट्रेट से सैकड़ों की संख्या में बेहद शक्तिशाली आईईडी (इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाई जा सकती थीं। अमोनियम नाइट्रेट सफेद पाउडर जैसा केमिकल होता है। यह आमतौर पर खाद के तौर पर खुलेआम मिलता है और ज्यादा महंगा भी नहीं है। इसके साथ डेटोनेटर, बैटरी और टाइमर जोड़ने से यह घातक बम बन जाता है। यही तरीका प्रेशर कुकर बम या आईईडी बनाने में भी अपनाया जाता है। स्थानीय आतंकी मॉड्यूल ज्यादातर विस्फोटों में इसी का इस्तेमाल करते हैं।
दिल्ली और मुंबई में किया गया था इस्तेमाल…
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, 13 सितंबर 2008 में दिल्ली में हुए सीरियल धमाकों में आतंकियों ने अमोनियम नाइट्रेट का ही इस्तेमाल किया था। इसमें 25 लोगों की जान गई थी और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे। वहीं 2010 में राष्ट्रमंडल खेलों से पहले हुए धमाकों में भी इसी का इस्तेमाल हुआ था। 2011 में मुंबई के बाजार में हुए विस्फोट में भी इसी का उपयोग किया गया था। इसमें 23 लोगों की जान गई थी।



