बरेली
सगे भाई ने बहन को घर से निकाला, राशन कार्ड, वोटर लिस्ट से भी कटवाया नाम
न्याय के लिए दर-दर भटक रही सुनीता

नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली : तहसील मीरगंज के ग्राम बलूपुरा से पारिवारिक उत्पीड़न और सामाजिक बहिष्कार का एक हृदयविदारक मामला सामने आया है। एक स्नातक शिक्षित महिला, सुनीता शर्मा, अपने ही सगे भाई और भाभी के उत्पीड़न के कारण बेघर हो गई हैं। पीड़िता का आरोप है कि उनके भाई ने राजनीतिक रसूख और दबंगई के बल पर न केवल उन्हें घर से निकाला, बल्कि उनका नाम राशन कार्ड और ग्राम पंचायत की मतदाता सूची से भी कटवा दिया है। पिता की मृत्यु के बाद शुरू हुआ उत्पीड़न पीड़िता सुनीता शर्मा ने उप जिलाधिकारी (SDM) को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि वर्ष 2007 में उनके पिता की मृत्यु के बाद उनके भाई और भाभी ने उन्हें घर से धक्के देकर बाहर निकाल दिया। सुनीता ने बताया कि वह स्नातक (Graduate) हैं और उनके पास गांव का मूल निवास व जाति प्रमाण पत्र भी मौजूद है, इसके बावजूद उन्हें अपने ही हक से वंचित किया जा रहा है। वोटर लिस्ट और राशन कार्ड से नाम गायब मामले में चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब सुनीता को पता चला कि उनकी पहचान और नागरिक अधिकारों पर भी हमला किया गया है। सुनीता का आरोप है कि भाई ने अपनी दबंगई के बल पर सरकारी दस्तावेजों, जैसे राशन कार्ड और मतदाता सूची से उनका नाम हटवा दिया है। वर्तमान में सरकार द्वारा चलाई जा रही चुनाव संबंधी प्रक्रियाओं (जैसे SLI/Voter update) के बीच भी उनका नाम सूची में नहीं है। न्याय की गुहार: “क्या मैं देश की नागरिक नहीं?”
पीड़िता वर्तमान में अपने बहन-बहनोई के साथ रहने को मजबूर हैं। उन्होंने प्रशासन से भावुक सवाल करते हुए पूछा है कि “क्या मैं भारत की नागरिक नहीं हूँ? अगर पिता की मृत्यु हो चुकी है और मेरी शादी नहीं हुई है, तो क्या मुझे पैतृक संपत्ति और अधिकारों से वंचित रखा जाएगा?”
प्रशासनिक रुख मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी कार्यालय में प्रार्थना पत्र स्वीकार कर लिया गया है। दस्तावेजों पर अंकित हस्तलिखित निर्देशों के अनुसार, मामले में ‘जांच के बाद आवश्यक कार्यवाही’ के आदेश दिए गए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पीड़ित महिला को उसका खोया हुआ सम्मान और नागरिक अधिकार कितनी जल्दी वापस दिला पाता है।



