राजस्थान
रामगंज मंडी में होगा संत रामपाल जी महाराज का एक दिवसीय विशाल सत्संग और निःशुल्क नाम दीक्षा का आयोजन

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
रामगंज मंडी। शहर के उण्डवा रोड स्थित स्टील फैक्ट्री परिसर में रविवार, 19 अप्रैल 2026 को एक दिवसीय विशाल जिला स्तरीय सत्संग का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में आयोजक समिति द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित कर कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई। आयोजकों ने बताया कि उक्त स्थल पर पूर्व में भी संत रामपाल जी महाराज के सानिध्य में सत्संग कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं, जिनमें बिना दहेज और बिना आडंबर के सरल विवाह संपन्न कराए गए थे। ये विवाह क्षेत्र में चर्चा का विषय रहे थे। आगामी 19 अप्रैल को आयोजित होने वाले इस सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को अध्यात्म से जोड़ना एवं सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूक करना है। सत्संग के दौरान निःशुल्क नाम दीक्षा का भी आयोजन किया जाएगा, जिससे इच्छुक श्रद्धालु नाम ग्रहण कर सकेंगे।
संत रामपाल जी महाराज के जीवन और उद्देश्य पर भी डाली रोशनी
प्रेस वार्ता में आयोजक समिति ने बताया कि संत रामपाल जी महाराज का जन्म 8 सितंबर 1951 को हरियाणा राज्य के धनाना गांव में एक किसान परिवार में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही प्राप्त की तथा डिप्लोमा करने के बाद सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के पद पर लगभग 18 वर्षों तक सेवा दी। वर्ष 1988 में उन्होंने संत स्वामी रामदेवानंद जी महाराज से दीक्षा प्राप्त की। इसके पश्चात 1993 में अपने गुरु द्वारा उन्हें सत्संग करने तथा 1994 में नामदान देने का आदेश मिला। अपने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए उन्होंने भक्ति मार्ग अपनाया और वर्ष 2000 के आसपास अपनी नौकरी त्यागकर पूर्ण रूप से मानव कल्याण के कार्यों में जुट गए। उन्होंने हरियाणा के बरवाला और करोथा में सतलोक आश्रम की स्थापना की, जो लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बने।
कैसे बने संत रामपाल जी महाराज किसान मसीहा कैसे बने गरीबों के सुपर हीरो
देशभर में अपने आध्यात्मिक संदेशों के साथ सामाजिक कार्यों को लेकर चर्चा में रहने वाले संत रामपाल जी महाराज को लोग अब “किसान मसीहा” और गरीबों के “सुपर हीरो” के रूप में देख रहे हैं। इसका मुख्य कारण उनकी प्रेरणा से चल रही “अन्नपूर्णा मुहिम” और जरूरतमंदों की सहायता के लिए किए जा रहे विभिन्न सेवा कार्य हैं। बताया जाता है कि इस मुहिम के तहत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को राशन सामग्री उपलब्ध कराई जाती है, यहां तक कि जिनके घर नहीं हे उन्हें घर भी बना कर देते हैं जिससे कई परिवारों को राहत मिल रही है। अनुयायियों का कहना है कि इस पहल ने विशेष रूप स आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव डाला है। वहीं किसानों के हितों को लेकर भी संत रामपाल जी महाराज के विचारो से लोग उन्हें “किसान मसीहा” की संज्ञा देते हैं। उनका मानना है कि संत जी द्वारा दिए गए संदेशों से किसानों को आत्मनिर्भर बनने और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने की प्रेरणा मिलती है। अन्नपूर्णा मुहिम के अंतर्गत समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर खाद्य सामग्री वितरण, रक्तदान शिविर, दहेज मुक्त विवाह और अन्य सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग भाग लेते हैं।
इसी कड़ी में अन्नपूर्णा मुहिम के तहत पंजाब सहित देश के कई हिस्सों में आई बाढ़ के दौरान पीड़ित किसानों और जरूरतमंद परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई गई। बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में अनुयायियों द्वारा राशन, भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया गया, यहां तक कि किसानों के खेतों से पानी निकालने के लिए हजारों मोटर और लाखों फिट पाइप भी निःशुल्क उपलब्ध करवाए गए जिससे प्रभावित लोगों को काफी सहारा मिला। इसी कारण से संत जी को किसान मसीहा और गरीबों के सुपर हीरो कहा जाता हैं है



