सिंगरौली
सीएम कार्यक्रम में लगाई गई स्कूल बसें, बच्चे व परिजन हुये परेशान
सीएम के कार्यक्रम में स्कूल बसों सहित जिलेभर से करीब दो सौ से अधिक बसों को किया गया था अटैच

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली । शुक्रवार को जिले भर में स्कूली बच्चों को लेने उनकी स्कूल बस नहीं आई, जिसके कारण बच्चों को और पैरेंट्स को भी काफी परेशान होना पड़ा। सुबह से पैरेंट्स अपने कामकाज छोड़कर बच्चों को स्कूल ले जाने में जुटे रहे और फिर दोपहर तक में स्कूल की छुट्टी के वक्त भी कामकाज से समय निकाल कर उन्हें स्कूल से वापस घर भी ले गये। इस भागदौड़ के कारण अधिकांश लोगों का रूटीन बिगड़ गया और अन्य कई प्रकार से भी परेशान होना पड़ा। एक तो ये सीजन बारिश का चल रहा है, ऐसे में जिन बच्चों को पैरेंट्स बाइक से ले जाते रहे उन्हें ये भय सताता रहा कि कहीं बारिश न हो जाये, वर्ना समस्या हो जायेगी। वहीं कुछ पैरेंट्स ऐसे भी रहे जिन्हें कामकाज से छुट्टी नहीं मिली या किसी कारण से समय नहीं निकाल पाये, तो ऐसे पैरेंट्स के साथ-साथ उनके बच्चों को विभिन्न प्रकार से परेशान होना पड़ा। ये समस्या जिलेभर में अधिकांशतः बनी रही और इसके लिए लोग इस अव्यवस्था के जिम्मेदारों को दिनभर कोसते भी रहे। बता दें कि शुक्रवार को सरई में आयोजित सीएम के कार्यक्रम में स्कूल बसों सहित जिलेभर से करीब दो सौ से अधिक बसों को अटैच किया गया था, जिससे बसें स्कूली बच्चों को सेवा नहीं दे सकीं।
ज़्यादा दूरी वाले परिजन रहे परेशान
बताया जा रहा है कि स्कूली बच्चों की बसों को सीएम के कार्यक्रम में अटैच करने पर खासकर उन बच्चों और पैरेंट्स को अधिक परेशान होना पड़ा, जिनकी स्कूल घर से अधिक दूर थी। ऐसे में जो बच्चे वैढ़न, विंध्यनगर, नवानगर, जयंत आदि आसपास के क्षेत्र से शक्तिनगर तरफ के स्कूलों में जाते हैं और जो बच्चे वैढ़न से जयंत तरफ के स्कूलों में पढ़ने जाते हैं, उन्हें और उनके पैरेंट्स को अधिक परेशान होना पड़ा। पैरेंट्स का कहना था कि आखिर राजनीतिक या ऐसे अन्य कार्यक्रमों के लिए स्कूली बसों का यूं उपयोग करके बच्चों को परेशानी में डालना क्या सही है?
स्कूलों की भी टेंशन बनी रही
स्कूल बसों का संचालन नहीं होने से बच्चों व पैरेंट्स के साथ-साथ स्कूल प्रबंधन की भी टेंशन बनी रही। ये टेंशन खासकर छोटी कक्षा के बच्चों को लेकर थी। दरअसल, छोटी कक्षा के बच्चों को लेने के लिए जो पैरेंट्स नहीं पहुंच पाये थे, वह अपनी जगह किसी न किसी को भेजे थे, ऐसे में पैरेंट्स के अलावा किसी अन्य को बच्चे को सौंपने के लिए स्कूल प्रबंधन को भी अपने स्तर पर विभिन्न प्रकार से कन्फर्मेशन करनी पड़ रही थी, जिससे बच्चा किसी गलत हाथ में न जाने पाये।
क्या कहते हैं पैरेंट्स?
बच्चों को स्कूल बस लेने नहीं आयेगी, ये मैसेज अचानक मिलने से मुझे अपने रूटीन के कार्यों का शेड्यूल बदलना पड़ा। मेरे ड्यूटी टाइम के बीच से छुट्टी लेकर बच्चे को लेने जाना पड़ा। इससे भागदौड़ काफी बढ़ गई और परेशान होना पड़ा, इसलिए इस प्रकार के कार्यक्रमों से बच्चों को दूर रखना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्यवश इस पर कोई जिम्मेदार विचार नहीं करता और नेता भी अपनी रोटी सेंकने में मशगूल रहते हैं। – अंबिका प्रसाद लखेरा
स्कूल बसों को कार्यक्रम में शामिल करने से बच्चों की शिक्षा में खलल डालना बिल्कुल भी सही नहीं, मुझे तो लगता है कि सीएम साहब के ऐसे कार्यक्रम करने का कोई मतलब नहीं है, जिसमें बच्चों के भविष्य को दांव पर लगाया जाए। स्कूल बसों को कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए उपयोग किया गया। – आर एल शाह




