
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
हापुड़। जनपद में एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही सामने आई है । सिम्भावली सीएचसी में दो महिलाएं प्रसव के लिए पहुंची थी , जहां ऑक्सीजन की कमी के कारण दोनों नवजात बच्चों की मौत हो गई । परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में बिजली की व्यवस्था नहीं होने पर लेबर रुम में मोबाइल फोन की रोशनी में ही डिलीवरी कर दी गई । इस दौरान बिजली आपूर्ति ना होने से आक्सीजन की सप्लाई नहीं हो पाई जिसके चलते दो नवजात बच्चों की मौत हो गई । वहीं इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सीएमओ सुनील त्यागी मामले की जांच करने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पहुंचे।


आपको बता दें कि सिम्भावली सीएचसी में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण प्रसव के दौरान दो नवजात बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। दो अलग अलग महिलाएं डिलीवरी के लिए सरकारी अस्पताल में भर्ती हुई थीं। परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में उनकी बेटी प्रियंका को डिलीवरी के लिए भर्ती कराया गया था। जहां पर रात 10 बजे डिलीवरी के दौरान नवजात बच्चे की मौत हो । डिलीवरी के समय बिजली चली गई थी , इस दौरान वहां पर बिजली व्यवस्था ना होने के कारण मोबाइल फोन की टोर्च की रोशनी से ही डिलीवरी करवाईं गई । इस दौरान अस्पताल में ऑक्सीजन की व्यवस्था तक नहीं थी । परिजनों ने आरोप लगाया कि नवजात की मौत के बाद उसको हापुड़ जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया । जिसके लगभग पौन घंटे बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची थी ,जिसके बाद हापुड के जिला अस्पताल लेकर गए , जहां बच्चों को मृत घोषित कर दिया गया।

इस मामले मे मृतक नवजात शिशु के नाना सतीश ने बताया कि मेरी बेटी के प्रसव पीड़ा शुरू होने पर सीएचसी सिखेड़ा लाया गया था , जहां रात दस बजे अस्पताल में लाइट नहीं थी , इसके बाद डॉक्टर ने लेबर रूम में मोबाइल की लाइट में ही बच्चा पैदा कराया , इसी दौरान बच्चे को ऑक्सीजन की कमी हुई तो लाइट नहीं होने के कारण बच्चे को ऑक्सीजन नहीं दी जा सकी , जिसके बाद लगभग पौन घंटे बाद एंबुलेंस मौके पर पहुंची और नवजात बच्चे को जिला अस्पताल हापुड रेफर किया गया जहां डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित किया गया ।
हापुड के सीएमओ सुनील कुमार त्यागी मामले की जांच के लिए सिखेड़ा सीएचसी पहुंचे और अधिकारियों की मीटिंग लेते हुए मामले की जांच के लिए टीम बना दी । जानकारी देते हुए सीएमओ ने कहा कि , ” हमारे यहां पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर भरे हुए है, ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर चालू है, जेनरेटर चालू हालत में है ,इनवर्टर भी हमारा चालू अवस्था में है । इस प्रकार की बात मेरे संज्ञान में अभी नहीं आई है ।लेकिन फिर मैने जांच के लिए टीम गठित की है। दिन में डिलीवरी हुई है मोबाइल से डिलीवरी कराने का कोई मतलब ही नहीं है । प्रथम दृष्टया बच्चों के गले में अवन नाल लिपटा हुआ था इसकी गहनता से जांच की जाएगी । बच्चे को ऑक्सीजन की कमी हो गई थी जिसके कारण बच्चे को एंबुलेंस के माध्यम से रेफर किया गया था। एक बच्चे को ALS तथा दूसरे को 108 के माध्यम से रेफर किया गया था । जांच की जा रही है

हालांकि सीएमओ सुनील कुमार त्यागी पीड़ित के घर पहुंचे और उन्हें सांत्वना देते हुए मामले की जांच के बाद कार्यवाही की बात कही है। इस दौरान उन्होंने पीड़िता / प्रसूता प्रियंका से भी बात की ।


