मुरादाबाद

एक ही बारिश ने करोड़ों रुपए खर्च करके मुरादाबाद में कराये जा रहे विकास पर नगर निगम के अधिकारियों की खोली कलई

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मुरादाबाद। स्मार्ट सिटी मुरादाबाद ने एक बार फिर साबित कर दिया कि करोड़ों फूंक कर भी शहर को ‘तालाब’ बनाने में कोई कसर नहीं। मुरादाबाद बारिश की नायाब मिसाल देखिए बस ज़रा सी बारिश और सड़कें छूमंतर! स्टेशन रोड, करूला, झब्बू का नाला, तहसील स्कूल, दौलतबाग, रेती स्ट्रीट हो या फिर पाॅश कालोनी रामगंगा विहार, दीनदयाल नगर, नवीन नगर या आशियाना कालोनी हो हर गली-नुक्कड़ पानी से लबालब। मजाल है कि आप बिना जूते-चप्पल बहोए घर पहुँच जाओ। ताजिये वालों ने भी हार नहीं मानी घुटनों तक गंदे नाले के पानी में डूब कर जुलूस निकाला, ताकि नगर निगम का ‘स्मार्ट ड्रीम’ सड़क पर बहता दिखे।
सांसद भी बनीं तालाब यात्री’
मुरादाबाद बारिश की पोल खोलने खुद सपा सांसद रुचि वीरा भी पानी में उतर आईं। बरसात की बूंदों ने स्मार्ट सिटी की इज्जत उतार दी, सांसद जी ने गली-गली भरे नाले नाप डाले। नगर निगम के अफसर दफ्तर में AC में खुद को ठंडा कर रहे थे और मोहर्रम के जुलूस वाले सड़क को गंगा-जमुना समझकर ताजिया तैराते रहे। कहने को महापौर विनोद अग्रवाल मुरादाबाद को लंदन बनाने चले थे  लेकिन लंदन तो छोड़िए, यहां तो नाले भी पेरिस बन चुके हैं, बस फर्क इतना है कि यहां गंदगी से सड़ांध मारती नदियां बह रही हैं।
करोड़ों खर्च नतीजा जीरो
सवाल ये है कि जलभराव इतनी मामूली बारिश में क्यों स्मार्ट सिटी के नाम पर सैकड़ों करोड़ किस जेब में घुसे? ठेकेदारों की जेब गर्म, जनता की सड़कें ठंडी  यहीं पूरा हिसाब है। बारिश की दो बूंदों ने नगर निगम का ‘विकास मॉडल’ बहा दिया। स्टेशन रोड से लेकर झब्बू के नाले तक सबूत बिखरे पड़े हैं  स्मार्ट सिटी का सपना असल में नगर निगम के लिए ठेका कमाने की स्कीम है, जनता के लिए घुटनों तक बजबजाती गटर यात्रा!
ताजिये के बहाने बह गया सिस्टम
मोहर्रम के ताजिया दारों ने जैसे-तैसे गंदे पानी में जुलूस निकाल कर दिखा दिया कि मुरादाबाद वालों की हिम्मत सिस्टम से कहीं ज्यादा मजबूत है। बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, घुटनों तक गंदे पानी में चले — लेकिन नगर निगम का ज़मीर नहीं हिला। मुरादाबाद में जलभराव बस एक बारिश में नहीं बनी  ये सालों से पल रहे भ्रष्टाचार और दिखावे के ठेके का नतीजा है। शहर वालों को न सड़कें मिलीं, न नाली बस गड्ढे और बहता पानी
किसकी होगी जवाबदेही
अब रुचि वीरा की ये जल यात्रा काम आई या नहीं, ये तो आने वाला वक्त बताएगा। महापौर प्रेस कांफ्रेंस में फिर दावा ठोकेंगे कि विकास जारी है। लेकिन अगली बारिश में फिर यही सुर्खी बनेगी। तब तक मुरादाबाद वाले नाले में नाव बना लें या गटर में जाल बिछा लें नगर निगम से उम्मीद रखना बेकार है। वोट मांगने वाले झूठ बोल जाएंगे, लेकिन पानी की सच्चाई हर बारिश में गली-गली बहती रहेगी।
पार्षद की भी होनी चाहिए जबाव देही
क्या कहते हैं असलम अंसारी
रेती मौहल्ला निवासी असलम अंसारी का कहना है कि एक ही बारिश ने नगर निगम के मुंह पर तमाचा जड़ दिया है मेरा मानना है इस लूट में पार्षद भी शामिल रहते हैं उनकी भी जबावदेही होनी चाहिए कि वो कौन सी सड़क नाली बनवा रहे हैं उसकी क्या स्थिति है
रामगंगा विहार से रमेश अरोरा
पाॅश कालोनी रामगंगा विहार से रमेश अरोरा कहते हैं हमारा पार्षद अबकी बार निर्विरोध चुना गया है इसका फायदा उठा रहा है कैसी सड़क बन रही है कौन सी बननी चाहिए कौन सी नहीं उसे कोई मतलब नहीं जनता ही बैठाती है जनता ही उतारती है
इस एक ही दिन की ताबड़तोड़ बारिश से जनता बहुत परेशान हो गयी है पर अब देखना यह है कि नगर निगम के अधिकारियों के कान पर जूं रेंगती है या नहीं
निचोड़,
बारिश के बाद हुए जलभराव ने मुरादाबाद की स्मार्ट सिटी पोल खोल दी है। हल्की बारिश में सड़कें गायब, नाले लबालब और ताजिया दार पानी में फंसे और नगर निगम सोता रहा। रुचि वीरा ने भी जल भराव में उतर कर हकीकत देखी। करोड़ों खर्च कर भी मुरादाबाद को स्मार्ट तालाब में बदल देना शायद यही असली स्मार्ट प्लान है!
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