जामताड़ा

भोजनाड़ीह की घटना पर भाजपा का विरोध: सुमित शरण के नेतृत्व में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन, सरकार की निंदा

BJP protests against Bhojanadih incident: Chief Minister Hemant Soren's effigy burnt under the leadership of Sumit Sharan, government condemned

सिराज अंसारी
नेशनल प्रेस टाइम्स ब्यूरो। जामताड़ा। झारखण्ड में आदिवासी अस्मिता के मुद्दे पर भाजपा का उग्र विरोध प्रदर्शन झारखण्ड के ऐतिहासिक स्थान भोगनाडीह में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा कथित तौर पर की गई बर्बर कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी ने राज्यभर में विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया। इसी कड़ी में जामताड़ा जिला मुख्यालय के सुभाष चौक पर भाजपा जिला कमेटी द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन कर कड़ा विरोध जताया गया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए “गद्दी छोड़ो,” “हेमंत सरकार मुर्दाबाद,” “तानाशाही नहीं चलेगी,” “आदिवासी अस्मिता के अपमान का बदला लेगा झारखंड” के नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भोगनाडीह की ऐतिहासिक और पवित्र भूमि पर आदिवासी अस्मिता को कुचलने का काम किया गया है, जिसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में भाजपा के जिला अध्यक्ष सुमित शरण, माधव चंद्र महतो, मंगल सोरेन, मुख्य निर्मल सोरेन, प्रदीप कुमार, मनीष दुबे, मौलाना अब्दुल रकीब रहमानी, किरण बेसरा, आभा आर्या समेत भाजपा कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों के सदस्यों और आम नागरिकों की भारी भीड़ जुटी। सुमित शरण, जिला अध्यक्ष ने कहा, “भोगनाडीह की ऐतिहासिक धरती पर सरकार द्वारा की गई बर्बर कार्रवाई न केवल आदिवासी समाज का अपमान है, बल्कि यह झारखंड की आत्मा पर हमला है। हम इसे कभी सहन नहीं करेंगे और लगातार विरोध जारी रहेगा।” उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह सरकार सिर्फ कुर्सी की राजनीति कर रही है और आदिवासियों के गौरव को रौंदने का काम कर रही है। माधव चंद्र महतो, नाला विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी ने कहा, “हेमंत सरकार ने आदिवासियों के गौरव को रौंदने की कोशिश की है, जिससे यह साबित होता है कि यह सरकार जनविरोधी है। अब समय आ गया है कि जनता जागे और ऐसे शासकों को सत्ता से उखाड़ फेंके।”मौलाना अब्दुल रकीब रहमानी ने कहा, “यह लड़ाई सिर्फ आदिवासी अस्मिता की नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की अस्मिता की है। जिस धरती से स्वतंत्रता आंदोलन की चिंगारी भड़की थी, वहां इस तरह की कार्रवाई करना हेमंत सरकार की जनविरोधी सोच को दर्शाता है।” प्रदर्शनकारियों ने भोगनाडीह को केवल एक स्थल नहीं, बल्कि आदिवासी इतिहास, आत्मसम्मान और बलिदान का प्रतीक बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की और आदिवासी अस्मिता का सम्मान नहीं किया, तो आंदोलन और तेज होगा। प्रदर्शन में भाजपा के अन्य नेताओं में भा.ज.यु.मो प्रदेश महामंत्री मनीष दुबे, महामंत्री दिलीप हेमब्रम, किसान मोर्चा के प्रदेश मंत्री कमलेश मंडल, जिला उपाध्यक्ष सुकुमार सरखेल, जिला मंत्री मोहन शर्मा, जिला मिडिया प्रभारी आभा आर्या, सह मिडिया प्रभारी प्रदीप राउत, किरण बेसरा, चंदन राउत, अबीता हांसदा, पिंटू गुप्ता, अंजनी तिवारी, अमित मंडल, रंजीत राणा, निर्मल सोरेन सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।

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