बेतुल

बैतूल मध्यप्रदेश लघु वेतन कर्मचारी संघ ने 15 सूत्रीय मांगों को लेकर शुरू किया चरणबद्ध आंदोलन 

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। मध्यप्रदेश लघु वेतन कर्मचारी संघ के आह्वान पर शुक्रवार, 7 नवम्बर को 15 सूत्रीय मांगों के समर्थन में प्रदेश व्यापी आंदोलन के तहत बैतूल सहित प्रदेश के सभी 55 जिलों में ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष रविंद्र पाटिल ने जानकारी देते हुए बताया कि आंदोलन के पहले चरण में सभी जिलों के कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा गया, जिसके माध्यम से मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन और मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन का ध्यान आकर्षित कराया गया है।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि यदि मांगों का निराकरण नहीं किया गया तो आंदोलन चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ेगा। दूसरे चरण में 28 नवम्बर को संभागीय आयुक्त को, तीसरे चरण में 12 दिसम्बर को सांसद, मंत्री, विधायक, प्रभारी मंत्री जैसे जनप्रतिनिधियों को, चौथे चरण में 26 दिसम्बर को कलेक्टर कार्यालयों में सांकेतिक धरना, पांचवें चरण में 16 जनवरी 2026 को भारत रत्न डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए शासन को संदेश दिया जाएगा। छठे चरण में 29 जनवरी को पत्रकार वार्ता आयोजित की जाएगी। अंतिम चरण में 21 फरवरी को भोपाल में सभी संभाग, जिला, तहसील और ब्लॉक के कर्मचारी विशाल प्रदर्शन करेंगे और मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।
– यह है प्रमुख 15 मांगें
ज्ञापन में प्रमुख 15 मांगें रखी गई हैं जिनमें चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती, भृत्य का पदनाम बदलकर कार्यालय सहायक किया जाना, आकस्मिक और कार्यभारित कर्मचारियों का नियमितीकरण, स्थाईकर्मी कर्मचारियों को नियमित का दर्जा, सभी कर्मचारियों को 01 जनवरी 2016 से सातवां वेतनमान देने, वर्दी धुलाई भत्ता 50 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये प्रतिमाह करने, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को शासकीय कर्मचारी घोषित करने, कोटवारों को नियमित सेवा का दर्जा देने, आशा-उषा कार्यकर्ताओं को पदोन्नति और नियमित वेतनमान देने, रसोइया कर्मचारियों का वेतन 15 हजार रुपये करने, एनपीएस की जगह ओपीएस लागू करने तथा वर्दी के बजट के अभाव में वर्दी राशि सीधे खाते में डालने जैसी मांगें शामिल हैं।
जिलाध्यक्ष रविंद्र पाटिल ने कहा कि संघ की इन सभी मांगों को लेकर शासन स्तर पर कई बार चर्चा हो चुकी है, किंतु आज तक ठोस निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि अब कर्मचारी वर्ग शासन की उपेक्षा से तंग आ चुका है और यदि मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन प्रदेश स्तर पर व्यापक रूप लेगा।
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