बालाघाट

मंत्री प्रहलाद पटेल की पुस्तक का हुआ  विमोचन

सर्वत्र श्रद्धा का विषय है परिक्रमा:- भागवत

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : परिक्रमा सर्वत्र श्रद्धा का विषय है. हमारा देश श्रद्धा का देश है. जीवन श्रद्धा और विश्वास के आधार पर चलता है और दुनिया भी. पहले जड़वादी नहीं मानते थे लेकिन अब वे भी मानते हैं. हमारे यहां जो श्रद्धा है वो ठोस श्रद्धा है किसी से कही सुनी नहीं है. प्रत्यक्ष प्रतीती के आधार पर है. उसके लिए प्रत्यक्ष प्रमाण है. प्रमाण को साझा करने वाले लोग है. वो प्रमाण आपको लेना है तो ले सकता है. प्रयास आपको करना होगा.
यह बात संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कही. इंदौर के ब्रिलियंट कनवेंशन सेंटर में उन्होंने मंत्री प्रहलाद पटेल की लिखी पुस्तक परिक्रमा कृपा सार का विमोचन किया. इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव व स्वामी इश्वरानंद , विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर,कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय व अन्य नेता भी उपस्थित थे.
 उन्होंने आगे कहा कि पुस्तक में परिक्रमा के अनुभव का वर्णन है. समझने न आने वाली बातें भी नर्मदा किनारे समझ आ जाती है. अपने का बोध कराने वाली नर्मदा मैया है. परिक्रमा में प्रहलाद जी को बोध मिला कि मोह छोड़ो, अंत:करण पवित्र करो स्वार्थ बिल्कुल मत रखो कर्तव्य करते चलो. सबको अपना मानकर कर्तव्य करते चलो.
*हमने विश्व का नेतृत्व किया*
हमने विश्व का नेतृत्व किया लेकिन किसी को दबाया नहीं उन्होंने आगे कहा कि भारत तीन हजार वर्षो तक सिरमौर देश रहा. तकनीकी प्रगति ऊंची थी. मनुष्य का जीवन सुखी व सुसंस्कारिता था. कोई कलह नहीं थी. हमने विश्व का नेतृत्व किया. किसी देश को जीता नहीं. किसी को बदला नहीं. व्यापार के लिए दबाया नहीं, जहां गए वहां सभ्यता दी. शास्त्र सिखाए, जीवन को उन्नत किया. मनुष्य के पास आज ज्ञान आ गया है. तथाकथित विकास हुआ. लेकिन पर्यावरण बिगड़ा. मनुश्य उन्नत बना भौतिक दृष्टि से लेकिन परिवार टूटने लगे. माता-पिता को रास्ते पर छोड़ देते हैं. संस्कार नहीं है. ऐसी विकृति आ गई है कि लडक़े को कहते है कि लडक़ी है तो मान लेते हैं. दो हजार वर्षों में ये हालत हो गई. सब प्रयोग हो गए. आज क्या नहीं है. भाव नहीं है, भक्ति नहीं है. अपनापन जोड़ता है लेकिन अपनापन नही है. हमारा संबंध है ये बताने वाला कोई नहीं है.
*छोटी नदी को भी मैया मानते हैं*
विदेश में नदी को मैया नहीं मानते. हमारे गांव में छोटी सूखी नदी को भी मैया कहते है. अमीर गरीब सब में भाव है, अपनापन है. जीवन चैतन्य आधारित अनुभूति पर हमने भारत को माता बनाया है. श्रद्धास विश्वास के संकल्प पर देश खड़ा करना ये कर्तव्य हमारे सामने है.
*एहसास करने का विषय नर्मदा*
स्वामी ईश्वरानंद ने कहा कि नर्मदा बोलने का विषय नहीं है. एहसास करना का विषय है. नर्मदा मैया का एहसास करना हो तो नर्मदा परिक्रमा कर आओ. परिक्रमा करने की परंपरा आज से नहीं है. परमात्मा की परिक्रमा करोगे तो परम पद प्राप्त होगा. सफल होना हो तो जीवन की परिक्रमा करो. राजनीतिक जीवन में राजनीतिक लोगों की परिक्रमा करोगे तो बड़े पद पर पहुंच जाएगा. जो भाव लेकर जाओगे उस भाव को पूर्ण करने का नाम है नर्मदा. किनारे बैठ कर आनंद लीजिए तो पता चलेगा मां नर्मदा क्या है.
*गोसेवा में व परिक्रमावासी में लगेगी एक-एक पाई*
मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि उन्होंने अपनी पुस्तक को छपने से पहले मना कर दिया था, क्योंकि उनका मकसद नर्मदा को बेचना नहीं था. पटेल ने कहा कि नर्मदा हमारी माता है, नदियां हमारी विरासत है, ये हमारा जीवन है, हम संकल्प लेकर जाए. इस पुस्तक का विमोचन सिर्फ विमोचन नहीं है, इसकी एक-एक पाई गोसेवा में और परिक्रमा वासी के लिए लगेगी.
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