बेतुल

बैतूल की कल्याणी को दिल्ली में मिला कंगला मांझी अचीवर्स अवार्ड-2025

विश्व आदिवासी दिवस पर नई दिल्ली में आयोजित हुआ राष्ट्रीय स्तरीय कार्यक्रम

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बैतूल। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी दिल्ली में आयोजित भव्य सांस्कृतिक और सामाजिक सम्मेलन में बैतूल जिले का नाम पूरे देश में रोशन हुआ है। श्री मांझी अंतर्राष्ट्रीय समाजवाद आदिवासी किसान सैनिक संस्थान नई दिल्ली एवं अखिल भारतीय माता दंतेवाड़ीन समाज समिति नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में अगस्त क्रांति मार्ग स्थित सिटी फोर्ड ऑडिटोरियम में आयोजित इस राष्ट्रीय कार्यक्रम में बैतूल जिले की होनहार आदिवासी बालिका कु.कल्याणी पिता गजानन कोडोपे को जूनियर कराटे चैंपियनशिप 2025 में स्वर्ण पदक जीतने पर कंगला मांझी अचीवर्स अवार्ड 2025 से सम्मानित किया गया। इसके अलावा कार्यक्रम में गजानंद राजनांदगांव छत्तीसगढ़ के माधुरी नृत्य दल, बैतूल जिले के सोनार खाप डंडार नृत्य दल तथा राता माटी बैतूल के गायकी नृत्य दल ने आदिवासी लोकनृत्य और लोकगीत प्रस्तुत कर माहौल को जीवंत कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा और तालवाद्य की गूंज ने दिल्ली के दर्शकों को मानो बैतूल और बस्तर के जंगलों में पहुंचा दिया।
श्री मांझी अंतर्राष्ट्रीय समाजवाद आदिवासी किसान सैनिक संस्थान के प्रदेश कोषाध्यक्ष श्रवण परते ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता कंगला मांझी संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष राजमाता श्रीमती फुलवा देवी कांगे ने की। मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. परदेसी राम वर्मा तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुंभ देव कांगे, जिला पंचायत सदस्य बालाघाट श्रीमती ज्योति उमरे, बेटा बचाओ अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष ईश्वर उमरे, भारतीय आदिम जाति सेवक दिल्ली के सचिव रविकांत झा एवं सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डी.के. प्रधान सहित मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से लगभग 2500 से अधिक कमला मांझी सैनिक एवं आमजन शामिल हुए।
– अधिकार और परंपरा को बचाने किया मंथन
विचार अभिव्यक्ति सत्र में प्रमुख कंगला मांझी संस्था सुश्री शशि कला सलाम, छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय कुमारी सविता सलाम, छात्र बस्तर विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ कुमारी सुष्मिता कांगे तथा व्यायाम शिक्षक आनंद पब्लिक स्कूल डोंडी लोहार श्री ऋषभ देव ने आदिवासी महापुरुषों के योगदान, संवैधानिक अधिकारों, भाषा-संस्कृति के संरक्षण और शिक्षा-खेल के महत्व पर सारगर्भित व्याख्यान दिए।
मुख्य वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की शक्ति उसकी परंपरा, संस्कृति और मेहनतकश जीवनशैली में है। इन्हें बचाना और आधुनिक विकास के साथ जोड़ना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की नई पीढ़ी न केवल अपनी संस्कृति को जिंदा रखे, बल्कि खेल, शिक्षा, विज्ञान और तकनीक में भी देश का नेतृत्व करे।कार्यक्रम का संयोजन कंगला मांझी संस्था की कानूनी सलाहकार सुश्री राजकुमारी कांगे व अखिल भारतीय माता दंतेवाड़ीन समाज समिति के महासचिव आर.एस.उइके ने किया।
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