“राजनीति मेरे लिए सेवा का माध्यम है, स्वार्थ का साधन नहीं” – ठाकुर राजेश चौहान

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
ग्राम टयौढी की मिट्टी में जन्मे ठाकुर राजेश चौहान ने राजनीति को पद या प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि सेवा का मार्ग बनाया।
भाजपा के समर्पित कार्यकर्ता, सामाजिक चिंतक और राजपूत समाज के एकजुटता के प्रतीक —
ठाकुर चौहान आज भी अपने गांव और जनपद में विकास की सोच के साथ कार्यरत हैं।
राजनीतिक सफर की शुरुआत
प्रश्न: ठाकुर साहब, राजनीति में कदम रखने की प्रेरणा आपको कहां से मिली?
उत्तर: वर्ष 1991 में मैंने भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के मंडल अध्यक्ष के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की।
उस समय राजनीति मेरे लिए अवसर नहीं, बल्कि जिम्मेदारी थी।
मैंने ठाना कि युवाओं की आवाज़ को गांव-गांव तक पहुंचाना है,
और संगठन को सशक्त बनाना है।
संगठन से जनता तक – सेवा का सिलसिला
उत्तर:
- 1994 में बना भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा, मेरठ जनपद का महामंत्री।
- 1997 में नियुक्त हुआ भाजपा मंडल अध्यक्ष (बागपत)।
- 2006 में मिला दायित्व भाजपा बागपत का महामंत्री।
- 2017 और 2019 में रहा छपरौली विधानसभा का प्रभारी।
- और 2022 के विधानसभा चुनाव में बड़ौत विधानसभा का संयोजक।
हर पद मेरे लिए एक अवसर था —
“नेतृत्व का नहीं, सेवा का।”
गांव के विकास में दिल से जुड़े कार्य
प्रश्न: राजनीति के साथ समाजसेवा की भावना कैसे जुड़ी रही?
उत्तर: मेरा मानना है कि राजनीति तब सार्थक है जब उसका लाभ जनता तक पहुंचे।
इसी सोच के साथ मैंने अपने गांव टयौढी में रोडवेज का मुख्य बस अड्डा बनवाया,
गांव में 12 सरकारी नल लगवाए,
और अपने खेत की जमीन से 16 फुट चौड़ा रास्ता गांव को समर्पित किया, जो आज भी सार्वजनिक उपयोग में है।
“जो अपनी धरती को कुछ लौटाए, वही सच्चा जनसेवक कहलाता है।”
राजपूत समाज की एकता का प्रतीक
प्रश्न: राजपूत समाज के लिए आपके प्रयास क्या रहे हैं?
उत्तर: वर्ष 2022 में मुझे राजपूत विकास समिति, जनपद बागपत का निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया।
मैंने समाज में शिक्षा, संगठन और एकता को सबसे बड़ा बल माना।
हमारा उद्देश्य यह है कि हर राजपूत युवा शिक्षित हो, आत्मनिर्भर बने और समाज में नेतृत्व की भूमिका निभाए।
पारिवारिक संस्कार – ईमानदारी की विरासत
प्रश्न: आपके जीवन में पारिवारिक संस्कारों का कितना प्रभाव रहा?
उत्तर: मेरे पिता स्वर्गीय श्री शिवनारायण सिंह जी, जो पटवारी थे,
अपनी ईमानदारी और निष्ठा के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध थे।
लोग आज भी उन्हें सच्चाई और न्याय के प्रतीक के रूप में याद करते हैं।
वर्ष 2005 में उनकी तेरहवीं संस्कार पर
देश के वर्तमान रक्षा मंत्री माननीय श्री राजनाथ सिंह जी स्वयं हमारे घर पधारे थे।
वह क्षण आज भी मेरे लिए प्रेरणा का स्रोत है।
पिताजी ने सिखाया कि –
“राजनीति में कुर्सी नहीं, कर्म बोलने चाहिए।”
भविष्य की दिशा और संकल्प
प्रश्न: आने वाले समय के लिए आपकी प्राथमिकताएँ क्या हैं?
उत्तर: मेरा संकल्प है कि बागपत का हर गांव शिक्षित, संगठित और सुरक्षित बने।
मैं चाहता हूं कि यहां के युवाओं को रोजगार, किसानों को उचित मूल्य और
हर नागरिक को सम्मान मिले।
मेरी राजनीति का मकसद पद नहीं, बल्कि जनता की उम्मीदों को पूरा करना है।
समाज के नाम संदेश
उत्तर:
समाज तभी आगे बढ़ता है जब उसमें एकता और संवेदना दोनों जीवित रहें।
मैं युवाओं से कहना चाहता हूं —
“राजनीति को लाभ का नहीं, सेवा का माध्यम बनाइए।
ईमानदारी और कर्म ही असली पहचान हैं।”



