
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो
अमेठी ,जायस। 7 मोहर्रम को मियां साहब के ईमाम बारगाह से बरामद हुआ। तारीखी अलम ऐतिहासिक परंपरागत 7 मोहर्रम का जुलूस बरामद हुआ जुलूस जो अपने परंपरागत तय शुदा रास्तों से होकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में शांति पूर्वक समाप्त हुआ।
इस ऐतिहासिक तारीखी अलम के जुलूस में हज़ारों हज़ार हुसैनी श्रद्धालु नौहाख्वानी के साथ या हुसैन के सदाओं से गूंज उठा इलाका।
कई क्षेत्रों से आई हुई अंजुमनों ने बेहतरीन नौहाख्वानी कर्बला की शहीदों की याद में पेश की।नौहाख्वानी के जरिए कर्बला का वाकया बयान करते हुए सभी की आंखें नम हो गई, कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन के साथियों ने दोपहर की नमाज पढ़नी चाही। इतने में यजीदी फौज ने तीरों की बारिश कर दी। हुसैन के दो साथी सईद और जोहैर रखवाली कर रहे थे। इस बीच दोनों साथी अपने सीने पर तीर रोकते रहे और नमाज खत्म होते ही जमीन पर गिरे और शहीद हो गए। एक-एक करके हुसैन 71 शहीदों के शव उठा चुके थे। हुसैन सबसे रुखसत होकर चले। इसी बीच उनकी चार साल की बेटी सकीना ने कहा, बाबा आप भी चले चाएंगे। उन्होंने कहा हां बेटी। तब सकीना ने कहा कि बाबा एक बार अपने सीने पर सुला दो। हुसैन तपती जमीन पर लेट गए और सकीना को सीने पर सुलाया।

