
: ईश्वर की नियामत आंखों को अपने साथ न ले जाएं, दूसरों की जिंदगी को रोशन करने को दान करें।
: आपकी आंखें दूसरों के जीवन में रोशनी भरने में आएंगी काम, आपकी आंखों से दिखेगी दुनिया।
बरेलीः विश्व नेत्रदान दिवस प्रतिवर्ष 10 जून को मनाया जाता है। इस दिन नेत्रदान के महत्व बता कर उन्हें मृत्यु के बाद अपनी आंखें दान करने की शपथ लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। जिससे मरने के बाद भी आपकी आंखें दुनिया देख सकें। नेत्रदान को बढ़ावा देकर ही लोगों की अंधकारमय जिंदगी में ज्यादा से ज्यादा रोशनी लाई जा सकती है। यह बात एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के ऑपथैल्मोलॉजी विभाग की एचओडी डा.नीलिमा मेहरोत्रा ने कही। डा. मेहरोत्रा ने कहा कि दृष्टिहीनता प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। कॉर्निया की बीमारियां, मोतियाबिंद और ग्लूकोमा के बाद होने वाली दृष्टि हानि और अंधापन के प्रमुख कारणों में से एक हैं। स्मार्ट फोन का ज्यादा इस्तेमाल भी इसमें एक नई वजह बन कर सामने आ रहा है। ज़्यादातर मामलों में दृष्टि की हानि को ‘नेत्रदान’ से ठीक किया जा सकता है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके विभिन्न अंगों को दान किया जा सकता हैं तथा उन अंगों को उन रोगियों में प्रत्यारोपित किया जाता है, जिन्हें उनकी जरूरत हो। ‘आंख’ भी ऐसा ही एक अंग है। मृत्यु के बाद नेत्रदान से कार्निया रहित अंधा व्यक्ति शल्य प्रक्रिया के माध्यम से कार्निया प्रत्यारोपण द्वारा फिर से देख सकते हैं, जिसमें क्षतिग्रस्त कॉर्निया की जगह पर नेत्रदाता के स्वस्थ कॉर्निया को प्रतिस्थापित किया जाता है। लोगों को नेत्रदान के प्रति ज्यादा से जागरूक करना ही विश्व नेत्रदान दिवस का मकसद है। डा.मेहरोत्रा ने नेत्रदान से संबंधित प्रमुख सवालों के दिए जवाब…
सवालः मुझे नेत्रदान क्यों करना चाहिए ?
डा.नीलिमा- “नेत्रदान एक नेक काम है”। ऐसा कर आप दो या अधिक लोगों के जीवन में उजाला ला सकते हैं।
सवालः नेत्रदान कौन कर सकता है ?
डा.नीलिमा- कोई भी व्यक्ति चाहे वह किसी भी उम्र, लिंग, रक्त समूह और धर्म का हो, नेत्रदान कर सकता है। लेंस या चश्मे का उपयोग करने वाले व्यक्ति या जिन व्यक्तियों की आंखों की सर्जरी हुई हो भी नेत्रदान कर सकते हैं। कमज़ोर दृष्टि नेत्रदान में बाधा नहीं है।
सवालः मैं मधुमेह से पीड़ित हूँ, तो क्या मैं भी नेत्र दान कर सकता हूँ?
डा.नीलिमा- मधुमेह, उच्च रक्तचाप या अस्थमा से पीड़ित रोगी भी अपनी आंखें दान कर सकते हैं। मोतियाबिंद से पीड़ित रोगी भी अपनी आंखें दान कर सकते हैं।
सवालः कौन लोग नहीं कर सकते नेत्रदान ?
डा.नीलिमा- एड्स, हेपेटाइटिस बी या सी, रेबीज जैसे संक्रमण से पीड़ित व्यक्तियों के नेत्र प्रत्यारोपण के लिए उपयोग में नहीं लाये जाते।
सवालः मृत्यु के बाद कितनी देर तक नेत्रदान हो सकता है ?
डा.नीलिमा- मृत्यु के चार घंटे के भीतर नेत्रदान ज्यादा बेहतर है। लेकिन फिर भी मृत्यु के छह से आठ घंटे तक कॉर्निया सही होती है। इस अवधि तक नेत्रदान हो सकता है।
सवालः नेत्रदान करने से क्या व्यक्ति का चेहरा ख़राब हो जाता हैं ?
डा.नीलिमा- यह केवल एक मिथक है। नेत्रदान से व्यक्ति का चेहरा ख़राब नहीं होता। कॉर्निया का निकाला जाना किसी भी तरह की विकृति का कारण नहीं है। इससे कोई विकृति नहीं दिखती।
सवालः मैं अपनी आंखें कैसे दान कर सकता हूँ ?
डा.नीलिमा- नेत्र दान के लिए आपको शपथ पत्र भरना चाहिए। जिसे अपने नज़दीकी नेत्र बैंक को भेजना होगा। एक बार नेत्र दाता के तौर पर पंजीकृत होने के बाद आपको नेत्रदाता कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा। यदि नेत्र दान का फार्म नहीं भरा है तो भी नेत्रदान संभव है।
सवालः मैं यह कैसे जान सकता हूँ कि मुझे अपनी आँखें कहाँ दान करनी हैं ?
डा.नीलिमा- इसके लिए आप एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के आईबैंक के टोल फ्री नंबर 1919 या 0581-258200, 7900552000 पर कभी भी संपर्क कर सकते हैं। एसआरएमएस आई बैंक 2002 में आरंभ हुआ था। यहां 15 सौ से ज्यादा लोग नेत्रदान का शपथ पत्र भर चुके हैं।
सवालः कितने व्यक्ति मेरे नेत्रदान से लाभान्वित हो सकते हैं ?
डा.नीलिमा- नेत्रदान से कम से कम दो व्यक्ति लाभान्वित हो सकते है। दानकर्ता की दोनों आंखें दो या इससे अधिक कॉर्निया से नेत्रहीन व्यक्तियों को लगाई जाती हैं। एसआरएमएस में कार्निया प्रत्यारोपण का काम भी उसी दिन कर लिया जाता है।
सवालः मैं अपनी आंखें कब दान कर सकता हूं ?
डा.नीलिमा- नेत्रदान की शपथ किसी भी उम्र में ली जा सकती है, लेकिन नेत्रदान केवल मृत्यु के बाद ही किया जा सकता है। शपथ लेने वाला व्यक्ति दूसरों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करता है।
सवालः यदि मैं अपनी आंखें दान करता हूँ, तो यह बात क्या दूसरों को मालूम होगी ?
डा.नीलिमा- नेत्र दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की पहचान को गोपनीय रखा जाता है, इसलिए आपको अपनी पहचान के उजागर हो जाने के बारे चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
सवालः क्या नेत्रदाता के परिवार को किसी भी तरह का भुगतान या शुल्क मिलेगा ?
डा.नीलिमा- नहीं, मानव की आंखें, अंगों और ऊतकों को खरीदना व बेचना अवैध है। नेत्र प्रत्यारोपण के साथ जुड़े किसी भी तरह के खर्च का वहन नेत्र बैंक द्वारा किया जाता है।
सवालः नेत्रदान की शपथ लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु के बाद क्या करना चाहिए ?
डा.नीलिमा- नेत्र दाता की पलकें बंद करें। पंखा बंद करें, एयर कंडीशनर आन रख सकते हैं। मृतक का सिर तकिए के नीचे रखकर थोड़ा ऊपर उठाएं। जल्द से जल्द अपने नजदीकी मित्र बैंक के लिए 1919 पर संपर्क करें।
सवालः क्या नेत्रदाता को अस्पताल ले जाने की जरूरत होगी ?
डा.नीलिमा- नहीं, आपको केवल एसआरएमएस आई बैंक से संपर्क करने की ज़रूरत है। यहा की टीम नेत्र दाता के निवास या अस्पताल, जहां नेत्र दाता की मृत्यु हुई है, वहां जाकर कार्निया निकाल लेगी।
सवालः क्या नेत्रदान करने के लिए कुछ अन्य औपचारिकताएं भी हैं ?
डा.नीलिमा- परिजनों की लिखित सहमति से दो गवाहों की उपस्थिति में ही नेत्र दान किया जा सकता है।
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नेत्रदान न करने की वज़ह—
• आम जनता में जागरूकता का अभाव।
• संस्थानों एवं अस्पतालों में अपर्याप्त सुविधाएं।
• प्रशिक्षित कर्मियों के बीच दूसरों को प्रेरित करने की क्षमता का अभाव।
• सामाजिक एवं धार्मिक मिथक।
जरूर जाने—–
• स्त्री/पुरुष केवल अपनी मृत्यु के पश्चात ही नेत्रदान कर सकते हैं।
• नेत्रदान से केवल कॉर्निया से नेत्रहीन व्यक्ति ही लाभान्वित हो सकते हैं।
• कोई भी व्यक्ति चाहे, वह किसी भी उम्र, लिंग, या धर्म का हो, आंखें दान कर सकता है।
• कॉर्निया को मृत्यु के एक से आठ घंटे के भीतर निकाला जाना चाहिए।
• नेत्रदाता दो या इससे अधिक कार्निया से नेत्रहीन व्यक्तियों की दृष्टि बचा सकता हैं।
• नेत्र निकालने में केवल 10 से 15 मिनट लगते हैं तथा चेहरे पर कोई निशान नहीं रहता।
• दान की गई आंखों को खरीदा या बेचा नहीं जाता हैं, इसलिए नेत्रदान को नहीं न कहें।
• पंजीकृत नेत्रदाता बनने के लिए एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज के नेत्र बैंक से आज संपर्क करें।

