दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के बीच का हास् परिहास भोपाल को मेट्रो की सौगात दे गया l

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो l
छिंदवाड़ा l भोपाल मेट्रो की कहानी केवल एक परिवहन परियोजना की नहीं बल्कि यह सकारात्मक राजनीति, दूर दृष्टि और समय के साथ साकार हुए संकल्प की कहानी है। जिस योजना को कभी हंसी मजाक में कहा गया था l वहीं आज राजधानी भोपाल को सबसे बड़ी पहचान बनने जा रही है। इस कहानी की शुरुआत उस समय हुई l जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी और कमलनाथ केंद्रीय शहरी विकास मंत्री थे । उन्होंने मध्य प्रदेश के लिए हो रही विकास परियोजनाओं पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर जो उनके मित्र माने जाते थे l उनसे पूछ लिया गौर साहब क्या चाहते हैं l आप बताइए l इस पर स्व, बाबूलाल गौर ने हंसते हुए कहा ऐसे पूछ रहे हो, जैसे मेट्रो ही दे दोगे । इतनी बात होते ही दोनों हंसने लगे । पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री स्व बाबूलाल गौर के बीच का यही हास परिहास भोपाल मेट्रो का बीज बो गया ! स्वर्गीय बाबूलाल गौर ने जीवित रहते अपने भाषणों में कई बार बताया है कि कैसे उन्होंने अपने मित्र कमलनाथ से भोपाल में मेट्रो ट्रेन के लिए आग्रह किया और उसे स्वीकार करते हुए केंद्रीय शहरी विकास मंत्री रहते कमलनाथ ने जुलाई अगस्त 2011 में शहरी विकास मंत्रालय की एक टीम को भोपाल मेट्रो का सर्वे करने भेजा । उस टीम में कमलनाथ ने उस समय मेट्रो के विशेषज्ञ जो बाद में मेट्रो मैन के नाम से प्रसिद्ध हुए, डॉ ई धरन को भी विशेष रूप से भेजा और भोपाल मेट्रो के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति दिलवाई । समय बदला केंद्र में भाजपा सरकार बनी और राज्य में कांग्रेस सरकार। और प्रदेश के मुख्यमंत्री बने कमलनाथ। तब उन्होंने 27 सितम्बर 2019 को भोपाल मेट्रो का शिलान्यास किया । और उस कार्यक्रम में स्व,बाबूलाल गौर साहब के साथ मेट्रो ट्रेन को लेकर हुए हास परिहास को सार्वजनिक रूप से उजागर करते हुए उन्हें याद किया l और श्रद्धांजलि दी । आज भोपाल मेट्रो के उद्घाटन अवसर पर न केवल पूर्व मुख्यमंत्री स्व,बाबूलाल गौर बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के योगदान को भी याद रखना चाहिए ।




