
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
सिंगरौली । नगर निगम सिंगरौली में एक बार फिर योजनाओं की प्राथमिकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। निगम प्रशासन ने कैंपस परिसर में पार्किंग के लिए आरक्षित स्थान पर नया परिषद् हाल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। यह वही निगम है, जिसने महज तीन वर्ष पूर्व ही अपने भवन के ऊपरी तल पर लगभग 50 लाख रुपए की लागत से नया परिषद् हाल बनवाया था। अब सवाल यह है कि — क्या निगम को विकास की जरूरत है या “दोहरे निर्माण” के नाम पर फिजूलखर्ची की?
नए परिषद् हाल का प्रस्ताव जिस जगह पर रखा गया है, वह वर्तमान में निगम की मुख्य पार्किंग के रूप में उपयोग में लाई जाती है। परिषद् हाल बन जाने के बाद न केवल निगम के पास अपने वाहनों की पार्किंग की जगह नहीं बचेगी, बल्कि कर्मचारियों और आगंतुकों को सड़क पर वाहन खड़े करने की विवशता होगी। इससे न सिर्फ यातायात प्रभावित होगा बल्कि सुरक्षा और व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगेंगे।
50 लाख में बना था नया हाल — फिर क्यों नया प्रस्ताव?
साल 2022 में निगम के ऊपरी तल पर लगभग 50 लाख रुपए की लागत से नया परिषद् हाल तैयार किया गया था। उस समय इसे “आधुनिक सुविधाओं से युक्त” बताया गया था। अब महज तीन वर्ष बाद उसी निगम द्वारा नया हाल बनाने की पहल यह दर्शाती है कि या तो पिछली योजना दूरदर्शिता के अभाव में बनी थी या अब की योजना सुविधा से अधिक स्वार्थपरक सोच की उपज है।
भूमिगत पाइपलाइन पर निर्माण — नई मुश्किलें
यही नही प्रस्तावित जगह पर नगर निगम के जल वितरण तंत्र की मुख्य पाइपलाइन का जाल बिछा हुआ है। निर्माण के दौरान इन पाइपलाइनों को शिफ्ट करना पड़ेगा, जिसके लिए इंजीनियरिंग शाखा के अनुसार कम से कम 15 लाख रुपए का अतिरिक्त खर्च अनुमानित है। इससे स्पष्ट है कि यह नया हाल न सिर्फ जगह का संकट बढ़ाएगा, बल्कि आर्थिक बोझ भी डालेगा।
लागत 2 करोड़ से बढ़कर 3 करोड़ के पार
सूत्रों की मानें तो प्रारंभिक अनुमानित लागत 2 करोड़ रुपए रखी गई थी, लेकिन निर्माण की प्रक्रिया और डिज़ाइन परिवर्तन के चलते यह आंकड़ा 3 करोड़ रुपए के पार जा सकता है। यानि कि 50 लाख का पूर्व निर्माण, 15 लाख की पाइपलाइन शिफ्टिंग और अब 3 करोड़ का नया खर्च — कुल मिलाकर निगम की यह योजना वित्तीय अनुशासन के विपरीत एक महंगी पुनरावृत्ति साबित हो रही है।
जनप्रतिनिधियों में भी मतभेद
सूत्र बताते हैं कि कई पार्षदों ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जब पहले से कार्यशील परिषद् हाल मौजूद है, तो नया निर्माण “जनहित” नहीं बल्कि “निजी हित” का प्रतीक लगता है। वहीं निगम प्रशासन का पक्ष है कि नया हाल “वृहद और आधुनिक सुविधा” के अनुरूप बनाया जा रहा है।
दरअसल, सिंगरौली नगर निगम की मौजूदा परिस्थितियों में जहाँ सड़क, जलापूर्ति और स्वच्छता जैसी मूलभूत समस्याएँ अभी भी चुनौती बनी हुई हैं, वहाँ परिषद् हाल के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च करना विवेक से अधिक वैभव प्रदर्शन प्रतीत होता है। निगम का यह प्रस्ताव “विकास” के नाम पर विवेकहीन योजना प्रबंधन का उदाहरण बन सकता है। यदि जनप्रतिनिधि और अधिकारी सचमुच जनहित के प्रति संवेदनशील हैं, तो उन्हें पहले यह तय करना चाहिए कि जनता को सुविधाएँ चाहिए या भवनों की भव्यता।
अदूरदर्शी है यह प्रस्ताव: चन्द्र प्रताप विश्वकर्मा
नगर निगम सिंगरौली के पूर्व परिषद अध्यक्ष -चन्द्र प्रताप विश्वकर्मा ने प्रस्ताव पर आश्चर्य जताते हुए कहा है कि इतना अदूरदर्शी प्रस्ताव पास कैसे हो गया। इनके अनुसार 2022 से जबसे नई परिषद का गठन हुआ है तबसे से लेकर आज तक नगर निगम में कागजों पर भरपूर कार्य होना दर्शाया गया है लेकिन धरातल पर नहीं। नए परिषद भवन के निर्माण प्रस्ताव को अनावश्यक निरूपित करते हुए इन्होंने कहा है कि एक आधुनिक परिषद कक्ष के होते भारी-भरकम बजट में दूसरे निर्माण का औचित्य ही नहीं है। इससे बेहतर तो यह होगा निगम कार्यालय भवन के आधे हिस्से में जिसमें राजस्व विभाग का कब्जा है उसे खाली करा लिया जाए तो जगह की कमी स्वयं दूर हो सकती है।



