गोड्डा
गोड्डा के वीआईपी कॉलोनी से मरीज को खाट पर अस्पताल ले जाने को विवश हुए परिजन,
नहीं मिली एंबुलेंस की सुविधा

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
गोड्डा: शहर की वीआईपी कॉलोनी से गंभीर रूप से मरीज जनार्दन मंडल ( 77 वर्ष ) को सदर अस्पताल इलाज के लिए खाट का सहारा लेना पड़ा है। जो काफी शर्मनाक है। यह मामला चर्चा में बना हुआ है। क्योंकि शहर के सभी बड़े स्तर के अधिकतर अधिकारी इसी वीआईपी कॉलोनी में रहा करते है। परिजनों ने बताया वृद्ध को रात में अचानक पेट दर्द उठा। पहले तो परिजनों ने घरेलू उपचार करते हुए एंबुलेंस को बुलाने के लिए सिस्टम का दरवाजा खटखटाया। लेकिन रात भी जाने के बाद भी एंबुलेंस नहीं मिल पाया। सवेरे जब मोहल्ले वासी पीड़ित परिवार के घर पहुंचे तो वृद्ध के बीमारी हालत और परेशानी को देखते हुए जिस खाट पर वह दर्द से कर रहे थे, उसी खाट से मोहल्ले वासियों ने मदद कर मुख्य सड़क तक पहुंचा कर फिर एक वाहन से बीमार को सदर अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद सदर अस्पताल में चिकित्सकों द्वारा उनका इलाज प्रारंभ कर दिया गया है।
मरीज के पैर में घाव होने से चलने में परेशानी
पुत्री चंदा कुमारी ने बताया कि रोगी जनार्दन मंडल जुलाई माह से बीमार है। पैर में फोक होने के वजह से घाव हो गया है। चलने फिरने में असमर्थ हैं। बीते संध्या से पेट दर्द के बाद उन्हें अस्पताल ले जाने के लिए कोई गाड़ी या एंबुलेंस घर तक आने के लिए तैयार नहीं था। हमारा मरीज घर में तड़प रहा था, लेकिन एंबुलेंस ड्राइवर आने से मना कर दिया। कहता है कि सड़क इतना खराब है कि वाहन अंदर जा ही नहीं सकता। मजबूरी में खाट के सहारे मरीज को मुख्य सड़क तक ले जाकर अस्पताल पहुंचाया गया है। फिलहाल सुबह 8:00 से सदर अस्पताल में डॉक्टर से इलाज कर रहे हैं। रोगी भर्ती है।
मोहल्ले वासियों ने सिस्टम को सुनाई खरी खोटी, कहा : मुख्यालय में सिस्टम का बुरा हाल
वीआईपी कॉलोनी से एक पेसेंट को खाट पर अस्पताल ले जाने के मामले को लेकर मोहल्ले वासियों ने सिस्टम को खरी खोटी सुनाई है। हाल ये है की मुख्यालय स्थित वीआईपी कॉलोनी सुदूर वर्ती पिछड़े गांव की तरह विवश दिख रहा है। मोहल्लेवासी रंजीत कुमार ने कहा कि एक ओर जहां जिला मुख्यालय में गोड्डा तेजी से शहरी विकास का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर इसी नगर क्षेत्र की वीआईपी कॉलोनी के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। दिलचस्प बात तो यह है कि इसी मुख्य सड़क पर डीसी आवास, एसपी आवास, डीडीसी आवास, सहित अन्य बड़े अधिकारियों का आवास हैं, बावजूद इस कॉलोनी तक एक अदद एंबुलेंस की सुविधा मरीज को नहीं मिल पाई। हालात इतने बदतर हैं कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को खाट का सहारा लेना पड़ रहा है।
वीआईपी कॉलोनी के अंदर मोहल्ले में सड़क का हाल खस्ता
मोहल्लेवासी रंजीत कुमार ने यह भी बताया कि वीआईपी कॉलोनी के अंदर के मोहल्ले में सड़क का हाल भी पूरी तरह से खस्ता है। इस वजह से यहां एम्बुलेंस, टोटो, ऑटो एवं अन्य वाहनों के चालक जाने से कतराते हैं।
यह स्थिति कोई नई नहीं है। 2011 से यहां के लोग इसी हाल में जिने को विवश हैं। बारिश के मौसम में रास्ते कीचड़ और गड्ढों में पानी भर जाता हैं।
स्कूटी से स्कूल जानेवाले बच्चों को होती है परेशानी
मुहल्लेवासियों ने कई बार दिया आवेदन
स्थानीय लोगों ने बताया कि इस इस मामले को लेकर मुहल्लेवासियों द्वारा नगर परिषद से लेकर विधायक और मंत्री तक को कई बार लिखित आवेदन दिया गया है, लेकिन आज तक किसी ने सुधी नहीं लिया। इसी मोहल्लेवासी धनंजय शर्मा ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हम सबने मिलकर कई बार जनप्रतिनिधियों को आवेदन सौंपे, ज्ञापन दिए, लेकिन हमारी बात सिर्फ फाइलों तक ही सिमट कर रह गई है। अब तो हाल यह हो गया है कि स्कूल जाने वाले बच्चों की स्कूटी तक इस रास्ते पर फिसल कर गिर जाती है, टोटो पलटने की घटनाएं आम हो गई हैं।




