बाराबंकी

गरीबी, लाचारी और मौत के साए में फंसी एक मासूम ज़िंदगी

जब कोई आगे नहीं आया, तब आजाद समाज पार्टी के युवा नेता अशफाक उर्फ गुड्डू बने जीवनदाता; पत्रकार उस्मान अली की संवेदनशील पहल लाई रंग

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

बाराबंकी। जब समाज में नफरत और विभाजन की आवाज़ें तेज़ होती हैं, ऐसे समय में बाराबंकी जिला सरकारी अस्पताल से इंसानियत और एकता की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने हर संवेदनशील दिल को छू लिया।छपरा गांव (देवा शरीफ, बाराबंकी) की रहने वाली एक गरीब हिंदू परिवार की बेटी हर्षिता सिंह गंभीर एनीमिया से जूझ रही थीं। जांच में सामने आया कि उनके शरीर में मात्र चार यूनिट खून शेष था। डॉक्टरों ने तत्काल AB पॉजिटिव रक्त की जरूरत बताई, लेकिन आर्थिक तंगी ने परिवार को पूरी तरह बेबस कर दिया। न खून खरीदने की क्षमता थी, न लखनऊ जैसे बड़े शहर तक ले जाने का साधन।लगातार दो दिनों तक हर्षिता की हालत नाजुक बनी रही, हर पल ज़िंदगी और मौत के बीच झूलती रही एक मासूम जान।
इसी दौरान पत्रकार चौधरी उस्मान अली ने अस्पताल में परिवार से मुलाकात की। उनकी पीड़ा देखकर उस्मान अली ने अपने संपर्कों के माध्यम से मदद की अपील की, लेकिन वक्त बेहद कम था और कोई तत्काल आगे नहीं आया।तभी यह पुकार आजाद समाज पार्टी के युवा नेता अशफाक उर्फ गुड्डू तक पहुंची। बिना किसी देरी और बिना किसी भेदभाव के, अशफाक सीधे जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर पहुंचे और निःसंकोच रक्तदान कर दिया।
जैसे ही रक्त चढ़ा, हर्षिता की सांसे संभलीं, चेहरे पर उम्मीद की हल्की मुस्कान लौटी और आंखों से आंसू छलक पड़े।हर्षिता ने कहा—
“अगर समय पर खून न मिलता तो मुझे लखनऊ जाना पड़ता… हमारी हालत ऐसी नहीं थी कि वहां तक पहुंच पाते। आपने मेरी जान बचाई है।”इस मौके पर अशफाक उर्फ गुड्डू ने बेहद सादगी और मार्मिकता से कहा,आजाद समाज पार्टी किसी धर्म, जाति या समाज में भेदभाव नहीं करती। हम सब एक हैं। मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है और जरूरतमंद की मदद करना ही असली इबादत है।”
पत्रकार चौधरी उस्मान अली ने बताया कि उन्होंने दर्जनों लोगों से संपर्क किया, लेकिन निर्णायक समय पर सिर्फ अशफाक ही आगे आए।
जब समाज में नफरत की दीवारें खड़ी की जाती हैं, तब ऐसे ही छोटे लेकिन गहरे असर वाले कार्य उन दीवारों को गिरा देते हैं।
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