गाजियाबाद
सुहागिनों की आस्था ने रंग भरा लोनी के बाजारों में
करवाचौथ की रौनक में डूबीं सुहागिने, हाथों में मेहंदी,दिल में आस्था और आंखों में इंतजार चांद का ...
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
लोनी। आज सुहाग और सौभाग्य का पवित्र पर्व करवा चौथ होने के कारण शहर की गलियों और बाजारों में जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। महिलाओं की भारी भीड़ ने बाजारों में ऐसा माहौल बना दिया है कि जगह-जगह कदम रखने तक की जगह नहीं बची। सुहागिनों के इस विशेष पर्व की तैयारियों ने लोनी के मुख्य बाजार में, मेहंदी की दुकानों, ब्यूटी पार्लरों, कंगन और चुूड़ियों की दुकानों को चमका दिया है।
ब्यूटी पार्लरों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं, वहीं मेहंदी लगाने वालों के पास इतनी भीड़ है कि बात करने तक की फुर्सत नहीं। हर महिला अपनी हथेलियों पर खूबसूरत डिजाइन की मेहंदी रचवाने में व्यस्त है। बाजारों में करवे, चुनरी, पूजा की थाली, साज-सज्जा के सामान, श्रृंगार सामग्री और मिठाइयों की बिक्री पूरे क्षेत्रों में जोरों पर है।
दोपहर के बाद बाजारों में रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों — लाल, पीले, हरे रंग की साड़ियों और लहंगों — में सजी-धजी महिलाएं नजर आने लगीं। हर कोई अपने पति की लंबी उम्र और सुखी दाम्पत्य जीवन की कामना के इस पर्व को पूरी श्रद्धा और साज-सज्जा के साथ मनाने के उत्साह में डूबी नजर आई
करवा चौथ का महत्व
करवा चौथ का व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला उपवास रखकर चंद्रमा के दर्शन के बाद ही जल ग्रहण करती हैं। व्रत के दौरान महिलाएं मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं तथा करवे में जल भरकर कथा सुनती हैं। यह पर्व पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य के लिए समर्पित होता है।
शाम को चांद निकलने से पहले छतों और बालकनियों पर महिलाएं सोलह श्रृंगार में दुल्हन की तरह सजी दिखाई देंगी। करवा चौथ की कथा सुनने और चंद्रमा को अर्घ्य देने की तैयारियों के साथ घर-घर में पारंपरिक मिठाइयां और थाल सजाई जा रही हैं।
चांद की राह तकती निगाहें
जैसे ही शाम का समय ढलेगा, हर घर की छतों पर सुहागिनें छलनी और दीपक लिए चांद की राह निहारती नजर आएंगी। पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत तोड़ने के इस क्षण में हर महिला के चेहरे पर अद्भुत खुशी और संतोष झलकता है।
लोनी समेत आसपास के इलाकों में करवा चौथ का यह पर्व श्रद्धा, प्रेम और सिंगार की चमक से सराबोर हो गया है। बाजारों की रौनक और महिलाओं के उत्साह ने इस पारंपरिक त्यौहार को एक खूबसूरत सांस्कृतिक उत्सव का रूप दे दिया है।
