भगवान् श्रीराम जन्मोत्सव विशेष
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम न्याय और अन्याय के संघर्ष में सदैव पीडि़त के पक्षधर रहते हैं
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
ललितपुर। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर स्तम्भकार सिद्धार्थ शर्मा ने कहा कि भगवान बाल्मीकि ने राम की व्याख्या करते हुए कहा है कि रामोविग्रहवान धर्म अर्थात धर्म का मूर्तिमान रूप राम हैं। आदिकवि चरित्र और धर्म को समान मानते हुए कहते हैं राम सदा रहने वाले धर्म वृक्ष के बीज हैं और सभी मनुष्य उस वृक्ष के पत्ते और फल हैं। चरित्र के संतुलित एवं बहुमुखी विकास में उनका शरीर और मन दोनों सम्मिलित हैं। राम के कंधे चौंडे और उठे हुए हैं। हाथ घुटनों तक लंबे, गले की हड्डी मांस से दबी हुई, गर्दन शंख की तरह, सिर उत्तम ललाट चौड़ा, और आंखें बड़ी बड़ी, रंग चमकीला, सब अंग बराबर बंटे हुए हैं। बाल्मीकि के प्रश्न के उत्तर में नारदजी ने गुणों की जो सूची बनाई है, उस पर राम ही खरे सिद्ध होते हैं। बाल्मीकिजी का कहना है राम नियतात्मा हैं, इंद्रियजित हैं। कर्म की शक्ति बड़ी-चढ़ी है। संग्राम में पीछे पैर नहीं रखते। नीति में चतुर, सुंदर भाषण करने वाले, स्वजनों का भार उठाने वाले, शस्त्र और शास्त्र में पारंगत, सदा हंसकर बोलते हैं। न्याय और अन्याय के संघर्ष में पीडि़त के पक्षधर रहते हैं, चारित्रिक सफलता से युक्त ऐसी महान विभूति युगांतर तक निर्बल के बल, राम के रूप में सदा अमर हैं। जब तक नदियों और पर्वतों का इस धरा पर अस्तित्व रहेगा, तब तक रामचरित की महिमा का गुणगान इस धरा पर होता रहेगा।



