मथुरा

कोई बना गरीबों का मसीहा

तो किसी ने नहीं खोले तिजोरी के ताले; सांसद डिंपल और हेमामालनी

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
मथुरा। विवेकाधीन कोष की रिपोर्ट में कई जनप्रतिनिधियों के कामकाज की सच्चाई सामने आई है। राजनीति में जनसेवा शब्द का असली अर्थ भाषणों में नहीं, बल्कि उन फाइलों में छिपा होता है जो किसी गरीब की जिंदगी बचाने के लिए आगे बढ़ाई जाती हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 के विवेकाधीन कोष की ताजा रिपोर्ट ने ब्रज और अलीगढ़ मंडल के माननीयों के दावों की पोल खोल दी है। रिपोर्ट गवाह है कि जहां फिरोजाबाद के विधायक मनीष असीजा जैसे नेताओं ने अपने कोष को गरीबों की संजीवनी बना दिया, वहीं क्षेत्र के कई ऐसे दिग्गज भी हैं जिनके पास जनता के दुख-दर्द के लिए फुर्सत तक नहीं रही और उनका राहत कोष शून्य पर ही सिसकता रह गया।
कैंसर, हृदय रोग और किडनी जैसी जानलेवा बीमारियों के रोगियों के इलाज, सड़क दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं के शिकार हुए निर्धन परिवारों की मदद आदि के लिए सांसद, विधायक, एमएलसी आदि के पास विवेकाधीन कोष होता है। शासन ने 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 तक इस कोष से किस माननीय ने कितनी धनराशि खर्च की है, इसकी रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में फिरोजाबाद सदर विधायक मनीष असीजा का रिकॉर्ड अच्छा रहा है। उन्होंने 3.08 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कराकर 188 लाभार्थियों की मदद की। यह आगरा मंडल के सभी जिलों में सबसे अधिक है। वहीं, आगरा के बड़े मंत्रियों और मथुरा के जनप्रतिनिधियों का ग्राफ अपेक्षाकृत नीचे रहा। मैनपुरी की सांसद डिंपल यादव भी इस मामले में पीछे रहीं। उन्होंने अपने कोष से सिर्फ 11 लाख रुपये ही खर्च किए।
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