सिंगरौली

वंदना हॉस्पिटल की मनमानी पर प्रशासन का हंटर

सीएमएचओ का कड़ा नोटिस, क्या अब बंद होगी नियमों की दुकान?

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
 सिंगरौली : जिले के निजी अस्पतालों में मरीजों की जान से खिलवाड़ और नियमों को ठेंगा दिखाने का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा मामला गनियारी (वार्ड-41) स्थित वंदना हॉस्पिटल का है, जो अब सीधे प्रशासन के रडार पर आ गया है। भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं की शिकायतों के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने सख्त रुख अपनाते हुए अस्पताल प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
मौत का जाल: न फायर सेफ्टी, न साफ-सफाई
वंदना हॉस्पिटल के खिलाफ आरोपों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि किसी भी सभ्य समाज में इसे ‘अस्पताल’ कहना मुश्किल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक तीन मंजिला किराये के भवन में बिना किसी पुख्ता सुरक्षा इंतजाम के यह मौत का खेल चल रहा है।
फायर सेफ्टी नदारद: अस्पताल में आग से निपटने के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
गंदगी का अंबार: साफ-सफाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। संक्रमण मुक्त रखने के बजाय, यह अस्पताल खुद बीमारियों का केंद्र बनता जा रहा है।
भीड़भाड़ और घुटन: सीमित जगह में मरीजों को ठूस-ठूस कर भरना न केवल अमानवीय है, बल्कि मरीजों की जान को जोखिम में डालना भी है।
दवाइयों के नाम पर ‘लूट-खसोट’ का आरोप
अस्पताल केवल इंफ्रास्ट्रक्चर में ही नहीं, बल्कि मरीजों की जेब काटने में भी पीछे नहीं है। परिजनों का आरोप है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर महंगी और गैर-जरूरी दवाइयों का बोझ लादा जाता है। कमीशनखोरी के इस खेल ने गरीब मरीजों की कमर तोड़ दी है।
सड़क पर कब्जा: हादसों को खुला निमंत्रण
अस्पताल की दबंगई यहीं खत्म नहीं होती। अस्पताल के पास पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण वाहन सीधे सड़क पर और बिजली के ट्रांसफार्मर के नीचे खड़े किए जा रहे हैं। यह स्थिति न केवल यातायात को बाधित करती है, बल्कि किसी भी वक्त एक बड़े विद्युत हादसे या सड़क दुर्घटना का कारण बन सकती है।
सीएमएचओ की दो-टूक: “जवाब दो वरना होगी कार्रवाई”
इस गंभीर मामले पर सीएमएचओ डॉ. पुष्पराज सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि शिकायतों को संज्ञान में लेकर नोटिस जारी किया जा चुका है। प्रशासन अब अस्पताल के गोल-मोल जवाबों का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद नियमानुसार कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
बड़ा सवाल: क्या चंद रुपयों के लालच में नियमों को ताक पर रखने वाले ऐसे अस्पतालों को संचालित होने का अधिकार है? आखिर कब तक गनियारी की जनता और मासूम मरीज इन “इलाज की दुकानों” की लापरवाही का शिकार होते रहेंगे?
प्रशासन की यह कार्रवाई महज कागजी खानापूर्ति साबित होती है या वंदना हॉस्पिटल पर ताला लगता है, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
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