
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
मथुरा। यमुना जी में ‘चुनरी मनोरथ’ का आयोजन ब्रज की पुरानी परंपरा है। मथुरा, वृंदावन और गोकुल में हर महीने हजारों श्रद्धालु यमुना मैया को चुनरी अर्पित करने का मनोरथ करते थे। इस भव्य आयोजन से न केवल धार्मिक उल्लास जुड़ा था, बल्कि सैकड़ों लोगों का घर भी चलता था। नाव हादसे के बाद से प्रशासन ने नावों के संचालन पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिससे ये आयोजन पूरी तरह बंद हैं। श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं तो आहत हो ही रही हैं, साथ ही यमुना किनारे का व्यापार भी ठप पड़ गया है। सिर्फ नाविक ही नहीं, यमुना किनारे कंठी-माला और प्रसाद बेचने वाले छोटे दुकानदार भी खून के आंसू रो रहे हैं। दुकानदारों का कहना है की पहले घाटों पर यात्रियों की हलचल रहती थी, तो हमारी तुलसी की मालाएं और अन्य सामान आसानी से बिक जाता था। अब कोई यमुना किनारे आ ही नहीं रहा है। हमारी बोहनी तक के लाले पड़े हैं। हादसे के बाद प्रशासन ने सुरक्षा की दृष्टि से सभी नाविकों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, नगर निगम की नई पॉलिसी को लेकर नाविकों में भारी रोष है। नाविकों का आरोप है कि रजिस्ट्रेशन के नाम पर उनसे 10000 की मांग की जा रही है। नाविकों का कहना है कि वे गरीब हैं और इतनी बड़ी राशि देने में पूरी तरह असमर्थ हैं। विरोध कर रहे लोगों का कहना है कि न तो अभी तक लाइफ जैकेट की कोई पुख्ता व्यवस्था हुई है और न ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।



