नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : परशुराम जन्मोत्सव कार्यक्रम को लेकर पुलिस प्रशासन से समय रहते अनुमति ना मिलने के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि आखिर वह कौन सा पक्ष था, जो कार्यक्रम को रोकने के लिए सक्रिय था। आयोजकों का आरोप है कि अनुमति प्रक्रिया में प्रशासन द्वारा लगातार अड़चनें डाली गईं, जिससे कार्यक्रम के आयोजन पर लगातार अनिश्चितता बनी रही।
हालांकि, अब तक प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है कि देरी या बाधा के पीछे किसका हाथ था। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि क्या यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था या किसी दबाव के चलते निर्णय प्रभावित हुए।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि किसी पक्ष ने कार्यक्रम को न होने देने को प्रतिष्ठा का विषय बना लिया था, लेकिन इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि भ्रम और अफवाहों की स्थिति न बने। कार्यक्रम आयोजित करने के लिए समस्त ब्राह्मण समाज ने 20अप्रैल को आवेदन किया था लेकिन अनुमति मिली राष्ट्रीय सवर्ण समाज के सतीश शर्मा को,यह सब कैसे हुआ यह तो पुलिस प्रशासन ही बता सकता है
फिलहाल, कार्यक्रम संपन्न हो चुका है, लेकिन पूरे घटनाक्रम ने कई अनुत्तरित सवाल छोड़ दिए हैं, जिनका जवाब प्रशासन और संबंधित पक्षों से अपेक्षित है।
इस तरह खबर सवाल उठाती है, लेकिन बिना प्रमाण किसी पर आरोप नहीं लगाती यही पत्रकारिता का संतुलित तरीका होता है।



