असम PHE घोटाला
17,682 IRON REMOVAL फिल्टर व Mark‑II हैंडपम्प पर बड़े भुगतान पर आपूर्ति एवं दस्तावेजों में गड़बड़ी के गंभीर आरोप।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम : आरटीआई सक्रियक और अरण्य सुरक्षा समिति के सचिव दिलीप नाथ ने जनस्वास्थ्य अभियंत्रिकी विभाग (PHE), भड़ाल—बेटकुची के एक 2011 के वर्क ऑर्डर को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार M/s H.R. Enterprise, Jyotinagar, Bamunimaidan, Guwahati‑21 को प्रति यूनिट रु. 69,800/- की दर से 17,682 IRON REMOVAL HAND PUMP ATTACH फिल्टर और Mark‑II हैंडपम्प राज्य भर के गांव‑पंचायत, स्कूल व सार्वजनिक स्थानों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सप्लाई करने थे, पर ठेके का क्रियान्वयन संदिग्ध सिद्ध हुआ है। दिलीप नाथ ने दावा किया है कि सरकारी नियमों के विपरीत वर्क ऑर्डर के विज्ञापन आवश्यक अखबारों में सही रूप से प्रकाशित नहीं किए गए। Betkuchi Store & Workshop Division के कार्यालय ने केवल कुछ स्थानीय या अल्पप्रचलित समाचारपत्रों में एक महानगर संस्करण विज्ञापन प्रकाशित कराया; आवश्यक तीन असमिया दैनिक व एक अंग्रेजी दैनिक में विज्ञापन प्रकाशित नहीं कराया गया। आरटीआई और विभागीय दस्तावेजों से यह भी पता चला है कि अनुबंध में सुझाए गए विनिर्देश—200 MM से 1200 MM तक, 3 MM स्टील प्लेट से बने फिल्टर तथा Mark‑II हैंडपम्प—ठेकेदार द्वारा नहीं पहुँचाए गए। आरोप है कि ठेकेदार ने सस्ते, निम्न गुणवत्ता वाले पतले टिन से बने नकली फिल्टर उत्तर प्रदेश से ला कर भड़ाल/बेटकुची में रखवा दिए, जबकि Mark‑II हैंडपम्पों की आपूर्ति ही नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि कई जिलों के ग्रामीणों को लाभ नहीं मिला।नगाँव संभाग ने RTI (पत्र संख्या PHE I/EN/2022‑23/Misc‑39/400, दिनांक 28‑04‑2023) के माध्यम से पुष्टि की है कि Hand Pump की आपूर्ति नहीं हुई। शिकायतकर्ता ने 2017 में S.P., Vigilance & Anti Corruption, Assam को भी लिखित शिकायत दी; संबंधित फाइलें जप्त कर ली गईं और मामला Director, Anti Corruption के पास 29‑07‑2024 तक मौजूद था। यह मुद्दा मुकदमा संख्या 21/2017 के रूप में दर्ज है। 09‑11‑2016 को मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी शिकायत भेजी गई थी। उच्च न्यायालय में दर्ज WP (C) 6319/2017 के तहत जाँच में बिल, वाउचर व चालान में पते, तारीख व हस्ताक्षर के संबंध में विसंगतियाँ पाई गईं। अदालत के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों में H.R. Enterprise के मालिक के रूप में प्रांजल प्रतिम बरुआ का पता भेतापारा, बेलतोला दर्शाया गया, जबकि वर्क ऑर्डर ज्योतिनगर, बमुनिमैदान का था। विभाग ने दावे के बावजूद माना कि प्रांजल प्रतिम बरूआ के नाम पर कोई वर्क ऑर्डर नहीं था। फिर भी अदालत ने यदि आपूर्ति प्रमाणित हो तो भुगतान जारी करने के निर्देश दिए; किन्तु आपूर्ति न होने के बावजूद भारी रक़म को माफ़ या जारी करने के कारण अभी भी अस्पष्ट हैं।शिकायत में यह भी उल्लेख है कि ठेकेदार के TIN/GST नंबर सामान्यतः मिलने वाली 11‑अंकीय संख्या के बजाय 9‑अंकीय दिखते हैं, जिससे कर संबंधी अनियमितताओं का आशंका उत्पन्न हुई है। शिकायतकर्ता की मांग है कि पूरे मामले की स्वतंत्र व पारदर्शी जांच कराके राज्य को हुई धनराशि वसूली जाए, दोषियों पर सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाए और जिन जिलों के ग्रामीणों को निर्धारित उपकरण नहीं मिले उनके लिए आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। दिलीप नाथ ने कहा है कि सभी संबंधित दस्तावेज, RTI उत्तर व अदालतीन रिकार्ड मीडिया व अधिकारियों को सुपुर्द कर दिए गए हैं और मामले की निष्पक्ष जाँच की आवश्यकता है। विभाग और H.R. Enterprise के प्रतिनिधियों की ओर से इस समाचार प्रकाशित होने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक नहीं हुई है। मामला वेरिफिकेशन व आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए प्रासंगिक प्राधिकरणों के पास जारी है।



