बरेली
हीट वेव से बचाव को लेकर जिलाधिकारी ने जारी किए आवश्यक दिशा-निर्देश
लू और हीट स्ट्रोक से सतर्क रहें, दोपहर में धूप से बचें-जिलाधिकारी

अधिक पानी पिएं और हीट वेव अलर्ट पर दें ध्यान- जिला अधिकारी
नेशनल प्रेस टाइम्स ,ब्यूरो
बरेली । जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बताया कि हीट वेव (लू) भारतीय मौसम विभाग के अनुसार जब किसी जगह का स्थानीय तापमान लगातार तीन दिन वहां के सामान्य तापमान से तीन डि०से० या अधिक बना रहे तो उसे लू या हीट वेब कहते हैं ! हीट स्ट्रोक के लक्षण- गर्म, लाल, शुष्क त्वचा का होना और लगातार पसीना आना। नब्ज अर्थात पल्स का तेजी से चलना। श्वास गति में अत्यधिक तेजी का हो जाना। व्यवहार में परिवर्तन यथा भ्रम की स्थिति पैदा होना। सिरदर्द, मितली, थकान, चक्कर आना और कमजोरी महसूस होना। मूत्र का कम होना अथवा न आना।
कब लगती है लू-गर्मी में शरीर के द्रव्य/बॉडी फ्ल्यूड सूखने लगता है। शरीर से पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग, पुरानी बीमारी, मोटापा, अधिक उम्र, अनियंत्रित मधुमेह का होना इत्यादि कारक व्यक्ति को लू लगने की संभावना को बढ़ा देती है। उच्च तापमान से शरीर के आंतरिक अंगों, विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाता है। शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न होता है। मनुष्य के हृदय के कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव उत्पन्न होता है। जो लोग एक या दो घंटे से अधिक समय तक 40.6 डि०से0, 105 डि०फो० या इससे अधिक तापमान अथवा गर्म हवा में रहते है, उनके मस्तिष्क में क्षति होने की संभावना प्रबल हो जाती है। हीट वेव की स्थिति शरीर की कार्य प्रणाली पर प्रभाव डालती है। हीट वेव से प्रभावित व्यक्ति की मृत्यु होने की भी संभावना हो सकती है।
हीट स्ट्रोक से बचाव हेतु क्या न करें-छोटे बच्चों को कभी भी बंद अथवा खड़ी गाड़ियों में अकेला न छोड़ें। दोपहर 12 बजे से 03 बजे के मध्य सूर्य की रोशनी में जाने से बचें। सूर्य के तापमान से बचने के लिये जहां तक संभव हो घर के निचली मंजिल पर रहें। गहरे रंग के भारी तथा तंग कपड़े न पहनें। जब बाहर का तापमान अधिक हो तब श्रमसाध्य कार्य न करें। अधिक प्रोटीन तथा बासी एवं संक्रमित खाद्य एवं पेय पदार्थों का प्रयोग न करें। अल्कोहल, चाय व कॉफी पीने से भी परहेज करें।



