जालौन
जनपद के टाॅपर दस मेधावी विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
हाईस्कूल, इंटरमीडिएट के टॉप-10 छात्र-छात्राओं को 21-21 हजार रुपए की दी गई चेकें

विकास भवन में हुआ सजीव प्रसारण
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
उरई (जालौन)। सोमवार को मुख्यमंत्री द्वारा लोक भवन सभागार, लखनऊ से आयोजित मेधावी छात्र सम्मान समारोह में माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। प्रदेश स्तर पर कुल 1,682 मेधावी छात्र-छात्राओं, उनके अभिभावकों एवं प्रधानाचार्यों को सम्मानित करते हुए मुख्यमंत्री ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं तथा शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बताया।
इस अवसर का सजीव प्रसारण जनपद जालौन में विकास भवन के रानी लक्ष्मीबाई सभागार में आयोजित कार्यक्रम के माध्यम से देखा गया। कार्यक्रम के दौरान जनपद जालौन के हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शीर्ष 10-10 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। प्रत्येक मेधावी छात्र-छात्रा को 21 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई, जिससे उनकी प्रतिभा को नई पहचान और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल सके। हाईस्कूल परीक्षा में श्री बजरंग इंटर कॉलेज उरई के छात्र आदर्श दुबे ने 600 में 569 अंक प्राप्त कर जनपद में प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि इंटरमीडिएट परीक्षा में एएमवी इंटर कॉलेज जालौन के छात्र तनु खरे ने 500 में 459 अंक प्राप्त कर जनपद में शीर्ष स्थान हासिल किया। जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. घनश्याम अनुरागी ने कहा कि प्रदेश सरकार प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। आज सम्मानित हो रहे छात्र-छात्राएं न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे जनपद का गौरव हैं। सदर विधायक गौरी शंकर वर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य कर रही है। मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान यह संदेश देता है कि प्रतिभा और परिश्रम का सदैव सम्मान होता है। कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी ने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के भविष्य को नई दिशा देता है। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने जनपद के सभी मेधावी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार प्रतिभा को सम्मान और अवसर दोनों प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान विद्यार्थियों के परिश्रम, अभिभावकों के त्याग तथा शिक्षकों के मार्गदर्शन का परिणाम है।


