नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
झुंझुनूं। बेटियां अब परिवार और समाज के लिए गर्व का विषय बन रही हैं। बदलती सामाजिक सोच के बीच झुंझुनूं जिले के चनाना क्षेत्र के निकट स्थित सरदारपुरा लोयल गांव में नवजात बेटी के जन्म पर कुआं पूजन, दशोठण एवं छुछक कार्यक्रम आयोजित कर बेटा-बेटी समानता का संदेश दिया गया। किसान मातूराम बोयल की पत्नी मरवण देवी के परिवार में उस समय खुशियों का माहौल छा गया जब उनके पुत्र अरविंद बोयल की धर्मपत्नी राजकुमारी ने 5 मई 2026 को जनाना अस्पताल झुंझुनूं में पुत्री अपेक्षा बोयल को जन्म दिया। बेटी के जन्म की खुशी में परिवार ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उत्सव मनाया तथा समाज को यह संदेश दिया कि बेटियां भी परिवार की शान और सम्मान हैं। नवजात बेटी अपेक्षा के जन्मोत्सव पर ननिहाल पक्ष से प्रताप आल्हा, मामा आकाश आल्हा तथा अन्य परिजन सरदारपुरा लोयल पहुंचे। उन्होंने पारंपरिक रस्मों के अनुसार छुछक भरकर नवजात बच्ची को आशीर्वाद दिया और परिवार की खुशियों में सहभागी बने।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने कहा कि समाज में बेटियों को समान अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए। बेटी के जन्म पर इस प्रकार के आयोजन सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक हैं और इससे लोगों में जागरूकता बढ़ रही है।
सामाजिक कार्यकर्ता विकास आल्हा ने कहा कि बेटियों के जन्म पर खुशियां मनाना और उन्हें सम्मान देना एक प्रगतिशील समाज की पहचान है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को समानता और महिला सशक्तिकरण का संदेश देते हैं। इस अवसर पर गुरुदयाल बोयल, माईलाल बोयल, खेताराम, कमल बोयल,सामाजिक कार्यकर्ता विकास आल्हा, व्याख्याता शीशराम आल्हा, डॉ. राजेंद्र मेहरिया, धर्मपाल शीला, अनिल, विक्रम सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने नवजात बेटी अपेक्षा को शुभाशीष देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। बेटी अपेक्षा के जन्म पर आयोजित यह समारोह गांव और आसपास के क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। उपस्थित लोगों ने इसे समाज में बेटियों के प्रति बढ़ते सम्मान और सकारात्मक सोच का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में सभी ने एक स्वर में कहा कि बेटियां परिवार, समाज और राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं तथा उनके जन्म पर भी उतनी ही खुशियां मनाई जानी चाहिए जितनी पुत्र के जन्म पर मनाई जाती हैं।