बालाघाट

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा का आंदोलन

OBC जनगणना को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चे के पदाधिकारियो ने कलेक्टर कार्यालय मे सौपा ज्ञापन

1931 के नहीं हुई जातिगत जनगणना बाद 
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बालाघाट(म0प्र0) : देश  में लंबे समय से विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा ओबीसी की जनगणना कराए जाने की मांग की जा रही थी, लेकिन आजादी के बाद से ही देश में ओबीसी की जातिगत जनगणना नहीं कराई गई थी।ब्रिटिश हुकूमत ने 1871 से 1931 तक जातिगत जनगणना कराई, लेकिन आजादी के बाद ओबीसी की जातिगत जनगणना नहीं कराई गई।जिसके चलते जनसंख्या के आधार पर ओबीसी को उनका हक और अधिकार नहीं मिल पा रहा था।जनसंख्या के आधार पर ओबीसी को आरक्षण और सभी वर्ग क्षेत्रो हिस्सेदारी ना मिलने पर विगत कई वर्षों से सामाजिक संगठनों द्वारा ओबीसी की जनगणना कराए जाने की मांग की जा रही थी। जिसे देखते हुए देश मे जनगणना का कार्य तो शुरू कर दिया गया है।लेकिन जनगणना के फार्म में ओबीसी का कालम ही नही रखा गया है।जहां ओबीसी वर्ग को सामान्य में गिना जा रहा है।इस पर आपत्ति जताते हुए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग(ओबीसी) मोर्चा द्वारा सरकार के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया गया है।जिसके दूसरे चरण के तहत शुक्रवार 5 जून को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग(ओबीसी) मोर्चा द्वारा नगर के अंबेडकर चौक में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन कर अपनी इस प्रमुख मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की गई।इस दौरान पदाधिकारियो ने केंद्र सरकार पर ओबीसी का हक मारने का आरोप लगाते हुए धरना स्थल से नगर में एक रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय में एक ज्ञापन सौपा है।जिसमे उन्होंने जनगणना के फार्म में ओबीसी का कालम जोड़ने और ओबीसी वर्ग के सही आंकड़े जारी कर, जनसख्या के हिसाब से ओबीसी वर्ग को नौकरी में आरक्षण देते हुए सभी क्षेत्रो में ओबीसी वर्ग को आरक्षण देकर ओबीसी वर्ग को जनसख्या के अनुपात में हिस्सेदारी दिए जाने की मांग की है।
*ओबीसी वर्ग को मिले उसका हक और अधिकार* 
पदाधिकारियों ने बताया कि हमने हमेशा संविधान के दायरे में रहकर अपने हक की लड़ाई लड़ी है।ओबीसी जनगणना, केवल आंकड़े नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के हक, अधिकार और पहचान का सवाल है।ओबीसी समुदाय के इस हक -अधिकार के लिए कई बार धरना प्रदर्शन आंदोलन आवेदन निवेदन कर ज्ञापन सौपा गया है।इस जनगणना में ओबीसी वर्ग का कालम ना होने के चलते,ओबीसी वर्ग को हर क्षेत्र में काफी नुकसान हो रहा है और उन्हें जनसंख्या के आधार पर उनका हक अधिकार नहीं मिल पा रहा हैं।हमारी मांग है किजनगणना के आंकड़े पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किए जाए।ओबीसी वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में हिस्सेदारी दी जाए और केंद्र व राज्य स्तर पर नीति निर्धारण में ओबीसी वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।ताकि जनसंख्या के आधार पर ओबीसी वर्ग को हर क्षेत्र में आरक्षण मिल सके।
*जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी चाहिए*
पदाधिकारियों ने बताया की जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी का नारा बुलंद करते हुए ओबीसी जनगणना और जन संख्या के आधार पर आरक्षण दिए जाने की मांग की है। जिन्होंने स्पष्ट कर दिया कि 15 प्रतिशत लोग ,85 प्रतिशत लोगों पर राज नहीं करेंगे। जिन्होंने केवल सरकारी नौकरी ही नहीं बल्कि शिक्षा, रोजगार, राजनीतिक सहित अन्य क्षेत्रों में भी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिए जाने की मांग की है। वहीं उन्होंने इस मांग को लेकर पूरे देश में जनजागरूकता अभियान चलाकर अपनी इस मांग और हक अधिकार को लेने के लिए सड़को पर उतरकर आंदोलन किए जाने की चेतावनी दी है।
*जब पशुओं की जनगणना हो सकती है तो फिर ओबीसी की क्यों नहीं ?*
आयोजित धरना प्रदर्शन के दौरान पदाधिकारियो ने बताया कि वर्ष 1931 में ब्रिटिश काल में जातिगत जगणना हो सकती है तो स्वतंत्र भारत में ओबीसी जनगणना कराने में सरकार क्यों कतरा रही है,उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत में 2011 में जातिगत जनगणना हुई, लेकिन 2014 में देश की सरकार बदलने के बाद इन आंकड़ो को जारी नहीं किया गया। 1931 में हुई जनगणना में ओबीसी जाति के लोगों की संख्या 52 प्रतिशत थी। जिसके बाद सभी राज्यों को ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की वकालत की गई, लेकिन 27 प्रतिशत तो नहीं, संविधान के अनुसार 14 प्रतिशत आरक्षण भी ओबीसी वर्ग को नहीं मिल रहा है।1951 से लेकर 2011 तक अनुसूचित जाति, जनजाति की हुई जनगणना में आंकड़े जारी किए गए, लेकिन ओबीसी के आंकड़े जारी नहीं किए गए। जिसके कारण ओबीसी वर्ग को सामाजिक न्याय नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से पूछा कि जब पेड़-पौधे और पशु-पक्षियों की जनगणना हो सकती है तो ओबीसी की जनगणना क्यों नहीं?
*जनसंख्या के आधार पर हर क्षेत्र में दिया जाए प्रतिनिधित्व*
पदाधिकारियो ने बताया कि पूरे देश में 52 प्रतिशत ओबीसी के बावजूद उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते कैसे ओबीसी वर्ग के लिए योजना बनेगी और कैसे उन्हें लाभ मिलेगा। देश में सबसे ज्यादा ओबीसी समाज होने के बावजूद कार्यपालिका न्यायापालिका व कर्मचारियों की संख्या में ओबीसी का प्रतिशत ना के बराबर है। उन्होंने मांग की कि सरकार ओबीसी की जनगणना कराकर उसे हर क्षेत्र प्रतिनिधित्व दे।अब हम सामाजिक शोषण बर्दाश्त नहीं करेंगे।हमें जनसंख्या के आधार पर राजनीति, सरकारी नौकरी, आर्थिक, शैक्षणिक, रोजगार सहित अन्य क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व चाहिए।
*तो पूरे देश में किया जाएगा बड़ा आंदोलन- सदाशिव हरिनखेड़े*
राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग ओबीसी मोर्चा जिला अध्यक्ष सदाशिव हरिनखेड़े ने बताया कि अभी जो जनगणना हो रही है उसमें ओबीसी का कालम नहीं दिया गया है ऐसे में ओबीसी वर्ग को सामान्य वर्ग में गिना जा रहा है जब ओबीसी वर्ग का जनगणना में कालम ही नहीं होगा तो फिर ओबीसी के लिए बजट कहां से आएगा देश को आजाद हुए करीब 80 वर्ष बीत गए आज तक आजादी के बाद से ओबीसी की जाति आधारित जनगणना नहीं हुई है,जनगणना में एससी एसटी का कॉलम तो है लेकिन ओबीसी का कालम नहीं है जिसे लागू करने की मांग संगठन द्वारा की जा रही है।उन्होंने बताया कि अंग्रेजो के जमाने में 1931 में जाति आधारित जनगणना हुई थी उसे समय ओबीसी की संख्या 52 प्रतिशत थी, उस आधार पर ओबीसी को 52 प्रतिशत आरक्षण मिलना चाहिए, लेकिन ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया उसमें से भी महज 14 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया, लेकिन 14 की जगह ओबीसी वर्ग को 5 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है,इसी को लेकर संगठन द्वारा चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया गया है,यदि मांग पूरी नहीं होती तो 22 जून को राष्ट्रव्यापी रैली प्रदर्शन किया जाएगा, उस पर भी मांग पूरी न होने पर पूरे देश में बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
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