बागपत
गर्मी से बरसात और उमस भरे मौसम की ओर बढ़ रहे हैं हम: सावधानी ही सुरक्षा, जागरूकता ही बचाव
निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श के साथ डॉ. गौरव मलिक ने बताए स्वस्थ रहने के आसान उपाय

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बड़ौत/बागपत : हम गर्मी से बरसात और उमस भरे मौसम की ओर बढ़ रहे हैं। यह मौसम अपने साथ राहत तो लाता है, लेकिन कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियाँ भी लेकर आता है। तेज धूप के बाद अचानक बारिश, वातावरण में बढ़ती नमी (उमस) और तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित करते हैं। यही कारण है कि इस दौरान वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, टाइफाइड, पेट के संक्रमण, एलर्जी, त्वचा रोग और सांस संबंधी बीमारियों के मामले बढ़ने लगते हैं।
निकट जाट कॉलेज, नहर का पुल स्थित अपने केंद्र पर एमबीबीएस, एमडी (कंसल्टेंट रेडियोलॉजिस्ट) डॉ. गौरव मलिक लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श देकर बदलते मौसम में स्वस्थ रहने के प्रति जागरूक कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि लोग समय रहते सावधानी बरतें और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें, तो अधिकांश मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है।
मौसम बदलते ही क्यों बढ़ जाती हैं बीमारियाँ?
डॉ. गौरव मलिक बताते हैं कि गर्मी से बरसात की ओर बढ़ते समय वातावरण में नमी बढ़ जाती है। नमी और जलभराव के कारण बैक्टीरिया, वायरस और मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता है। साथ ही दूषित पानी और भोजन के कारण संक्रमण फैलने का खतरा भी अधिक हो जाता है।
उमस के कारण शरीर से पसीना अधिक निकलता है, लेकिन पसीना जल्दी सूख नहीं पाता। इससे शरीर थका हुआ महसूस करता है और कई लोगों को कमजोरी, चक्कर, सिरदर्द और बेचैनी की शिकायत होने लगती है।
किन लोगों को सबसे अधिक सावधानी की आवश्यकता?
डॉ. मलिक के अनुसार कुछ लोगों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए—
छोटे बच्चे
बुजुर्ग
गर्भवती महिलाएँ
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अस्थमा और हृदय रोग से पीड़ित मरीज
कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग
इन लोगों में संक्रमण जल्दी फैल सकता है और बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
समय पर जांच क्यों है जरूरी?
डॉ. मलिक बताते हैं कि कई बार लोग बुखार, खांसी, पेट दर्द या शरीर दर्द को सामान्य मौसमी परेशानी समझकर घरेलू उपचार करते रहते हैं। लेकिन यही लक्षण किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकते हैं।
आधुनिक जांच जैसे डिजिटल एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड तथा चिकित्सकीय परामर्श के माध्यम से बीमारी का सही कारण समय पर पता लगाया जा सकता है। इससे उपचार जल्दी शुरू होता है और मरीज गंभीर स्थिति में पहुंचने से बच जाता है।
इस मौसम में रखें विशेष सावधानी
डॉ. गौरव मलिक लोगों को निम्नलिखित सावधानियाँ अपनाने की सलाह देते हैं—
प्रतिदिन पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पिएँ।
बारिश का दूषित या जमा हुआ पानी पीने से बचें।
बाहर का खुला, बासी और कटा हुआ भोजन न खाएँ।
भोजन हमेशा ताजा और संतुलित लें।
हाथों को साबुन से बार-बार धोएँ।
घर और आसपास पानी जमा न होने दें।
मच्छरों से बचाव के लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनें तथा मच्छरदानी या रिपेलेंट का उपयोग करें।
भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
बच्चों को बारिश के पानी में लंबे समय तक खेलने से बचाएँ।
नियमित व्यायाम करें और पर्याप्त नींद लें।
ग्रामीण क्षेत्रों में क्यों बढ़ जाता है खतरा?
डॉ. मलिक बताते हैं कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में बरसात के दौरान जलभराव, दूषित पेयजल और साफ-सफाई की कमी के कारण संक्रमण तेजी से फैल सकता है। कई बार लोग छोटी बीमारी समझकर इलाज में देरी कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है।
वे सलाह देते हैं कि यदि दो-तीन दिनों तक बुखार बना रहे, तेज सिरदर्द हो, सांस लेने में परेशानी हो, लगातार उल्टी-दस्त हों या शरीर पर लाल चकत्ते दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।
स्वस्थ रहने का मूल मंत्र
डॉ. गौरव मलिक का कहना है कि स्वस्थ रहने के लिए केवल दवाइयाँ ही पर्याप्त नहीं हैं। अच्छी जीवनशैली, स्वच्छता और संतुलित भोजन भी उतने ही आवश्यक हैं। मौसम के अनुसार दिनचर्या में बदलाव करना, शरीर को हाइड्रेट रखना और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना कई बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
डॉ. गौरव मलिक की ओर से निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श
डॉ. गौरव मलिक लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य परामर्श के माध्यम से यह संदेश दे रहे हैं कि बीमारी को छिपाने या नजरअंदाज करने के बजाय शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर जांच और सही उपचार न केवल बीमारी को बढ़ने से रोकता है, बल्कि अनावश्यक खर्च और जटिलताओं से भी बचाता है।
डॉ. गौरव मलिक का संदेश
“हम गर्मी से बरसात और उमस भरे मौसम की ओर बढ़ रहे हैं। यह समय अपनी सेहत के प्रति अधिक सजग रहने का है। स्वच्छता, संतुलित खान-पान, पर्याप्त पानी, मच्छरों से बचाव और समय पर चिकित्सकीय परामर्श ही हमें मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रख सकता है। याद रखें, छोटी-सी लापरवाही बड़ी बीमारी का कारण बन सकती है, जबकि थोड़ी-सी सावधानी स्वस्थ जीवन की सबसे बड़ी गारंटी है।”
बरसात का मौसम प्रकृति को नई ऊर्जा देता है, लेकिन यदि हम स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहें तो यही मौसम अनेक बीमारियों का कारण भी बन सकता है। इसलिए जागरूक रहें, स्वच्छता अपनाएँ, स्वस्थ जीवनशैली बनाए रखें और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें। सावधानी अपनाइए, स्वस्थ रहिए—यही बदलते मौसम में सुरक्षित जीवन का सबसे बड़ा मंत्र है।


