ललितपुर
वायरल वीडियो से बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण पर उठे सवाल
बार रोड किनारे इस्तेमाल किए गए सिरिंज, ब्लड वायल मिलने का दावा

जांच से पहले गायब हुआ मेडिकल कचरा
कहीं नष्ट करने के बजाय बेचा तो नहीं जा रहा बायोमेडिकल वेस्ट? प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
ललितपुर। जिले में संचालित निजी पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में ग्राम बांसी से बार रोड के पास बड़ी मात्रा में इस्तेमाल किए गए सिरिंज, ब्लड वायल, सैंपल कलेक्शन ट्यूब और अन्य मेडिकल कचरा पड़े होने का दावा किया गया है। वीडियो सामने आने के बाद बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण की पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार जिले की विभिन्न पैथोलॉजी लैबों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे को एक अधिकृत एजेंसी द्वारा एकत्रित किया जाता है। निर्धारित नियमों के तहत इस कचरे को सुरक्षित तरीके से संग्रहित कर उपचार एवं निस्तारण केंद्र (ट्रीटमेंट प्लांट) तक पहुंचाकर वैज्ञानिक तरीके से नष्ट किया जाना आवश्यक है, जिससे संक्रमण और पर्यावरणीय खतरे से बचा जा सके। इसी बीच सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में बार रोड के पास बड़ी मात्रा में मेडिकल कचरा पड़ा दिखाई देने का दावा किया गया है। वीडियो में एक व्यक्ति इन इस्तेमाल की गई मेडिकल सामग्रियों की कथित बिक्री की बात करता भी सुनाई दे रहा है। हालांकि, इस वायरल वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि जब मीडिया टीम ने मौके का निरीक्षण किया तो वहां पहले मौजूद बताए जा रहे सिरिंज, ब्लड वायल और अन्य बायोमेडिकल कचरा नहीं मिला। ऐसे में मामला और भी संदिग्ध हो गया है तथा कई अहम सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिले में बायोमेडिकल कचरे का निस्तारण बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट नियमों के अनुरूप किया जा रहा है या नहीं? यदि वायरल वीडियो सही है तो क्या इस्तेमाल की गई मेडिकल सामग्री नष्ट करने के बजाय अवैध रूप से बेची जा रही है? यदि ऐसा हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और इससे आम जनता के स्वास्थ्य पर कितना गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है? विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमित मेडिकल कचरे का खुले में पड़ा रहना या उसका दोबारा उपयोग किया जाना संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकता है। ऐसे में इस प्रकार की किसी भी लापरवाही को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।



