बालाघाट

शिकायत वापस नहीं ली तो घर आकर तबाही मचा देंगे! 

जीआरएस की धमकी का ऑडियो वायरल, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत करना पड़ा भारी, रोजगार सहायक पर धमकाने के आरोप
जिला पंचायत से लेकर जनपद तक सूचना के बावजूद एक सप्ताह में जांच तक नहीं
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : जनपद पंचायत किरनापुर की ग्राम पंचायत मर्री में शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण कर मकान निर्माण का मामला अब गंभीर विवाद में बदल गया है। मामले में शिकायतकर्ता पवन कश्यप ने 181 पर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन शिकायत के बाद ग्राम रोजगार सहायक जितेन्द्र नंदागौली ने उसे फोन कर शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया। इतना ही नहीं, शिकायत वापस नहीं लेने पर घर आकर मारपीट करने और तबाही मचाने तक की धमकी दे डाली। इस मामले का शिकायतकर्ता को कथित धमकी का ऑडियो भी सामने आया है, जो अब चर्चा का विषय बना हुआ है।
शिकायत वापस लो, वरना घर आकर देख लेंगे
शिकायतकर्ता के अनुसार गत 6 अगस्त की रात करीब 8 बजे रोजगार सहायक ने फोन किया। बातचीत के दौरान कथित रूप से अभद्र एवं अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करते हुए शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। ऑडियो में शिकायतकर्ता को कथित तौर पर घर आकर देख लेने और तबाही मचाने जैसी बातें कही गई हैं। बातचीत में सरपंच संघ के अध्यक्ष प्रकाश बाहे से बात करवाने का उल्लेख भी सामने आता है। इससे सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या पंचायत स्तर का कर्मचारी शिकायतकर्ता को कानून अपने हाथ में लेने की धमकी दे सकता है?
अधिकारियों को सूचना, फिर भी कार्रवाई शून्य, आखिर किसका इंतजार?
मामले की जानकारी शिकायतकर्ता ने जिला पंचायत सीईओ, कलेक्टर, एसडीएम किरनापुर और जनपद पंचायत किरनापुर के सीईओ को तत्काल फोन के माध्यम से दी थी। अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिलाया, लेकिन करीब एक सप्ताह गुजरने जा रहा है इसके बाद भी आरोपों की जांच शुरू नहीं होने और रोजगार सहायक के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कोई कर्मचारी शिकायतकर्ता को खुले तौर पर धमकाने का आरोप झेल रहा है, तो प्रशासन जांच के नाम पर अब तक खामोश क्यों है? शासकीय भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत और उसके बाद कथित धमकी—दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच जरूरी है। कार्रवाई में देरी से शिकायतकर्ताओ में यह संदेश जा सकता है कि शिकायत करना ही उनके लिए मुसीबत बन जाएगा। प्रशासन को मामले की तत्काल जांच कर तथ्य सामने लाने और दोष सिद्ध होने पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
इनका कहना है
यह मामला मेरे संज्ञान में है, इस मामले का प्रकरण बना लिया गया है। तहसील कोर्ट में यह मामला है, कोर्ट से यह मामले का निराकरण हो जाता है तो बेदखली की कार्यवाही की जावेगी। बेदखली के साथ-साथ अग्रिम कार्यवाही के लिए जनपद सीईओ को निर्देश दिया जायेगा। वहीं जीआरएस द्वारा जो धमकी दी गई है उसके लिए शिकायतकर्ता एफआईआर करवा सकते है।
आदित्य नारायण तिवारी
एसडीएम, किरनापुर
Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button