असम के तिनसुकिया जिला प्रशासन ने मनाया “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस”, आयोजित हुआ चिंतन-विमर्श और जानकारी प्रदर्शनी।

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
असम : 1947 के विभाजन के दौरान हुई विभीषिकाओं, विस्थापन और मृत्यु के स्मरण में असम के तिनसुकिया जिला प्रशासन ने आज “विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस” मनाया। आयोजन तिनसुकिया वाणिज्य महाविद्यालय के प्रेक्षागृह में संपन्न हुआ, जिसका उद्देश्य नव-पीढ़ी को विभाजन के युग की भयावहता और उससे जुड़ी मानवीय त्रासदियों से अवगत कराना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना बताया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ तिनसुकिया वाणिज्य महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. चैतन्य बरा ने किया। मुख्य वक्ता के रूप में चबुआ के दाखादेवी राशिवासिया महाविद्यालय की सहायक प्राध्यापिका डॉ. प्लाविता दास ने भाग लिया। अपने वक्तव्य में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम, देश के विभाजन और विभाजन काल में उत्पन्न भयावह परिस्थितियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। डॉ. दास ने उस समय हुई जनकष्ट, पलायन और जीवन के टूटने की स्थिति का भावपूर्ण विवरण प्रस्तुत कर नव-पीढ़ी को इतिहास से सीख लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसी त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए समाज में आपसी समझ, सहानुभूति और विश्वास का माहौल बनाना अत्यंत आवश्यक है।कार्यक्रम में तिनसुकिया विधानसभा क्षेत्र के विधायक पुलक गोहांई ने भी यादगार वक्तव्य दिया। उन्होंने विभाजन काल की घटनाओं को स्मरण करते हुए कहा कि समाज को शांति और सौहार्द्र बनाए रखते हुए प्रगति की दिशा में अग्रसर करना सभी की साझा ज़िम्मेदारी है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की विभाजन जैसी विभीषिका न दोहराइ जाए। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के इस आयोजन में जिला विकास आयुक्त जावेद अरमान, जिला परिषद अध्यक्ष भद्रेश्वर मोरान, उपाध्यक्ष चित्रलेखा दुवारा सोना, तिनसुकिया नगर परिषद अध्यक्ष पुलक चेटिया, तिनसुकिया सभा की उपाध्यक्ष इंदिरा रॉय, सहायक आयुक्त बॉम्बी कुमारी सहित अन्य उच्च पदस्थ प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और महाविद्यालय के अध्यापक-छात्र उपस्थित रहे।समारोह के दौरान विभाजन से जुड़ी ऐतिहासिक जानकारियों और घटनाओं पर आधारित कई जानकारीचित्र (इन्फोग्राफिक) प्रदर्शनी भी लगाई गईं, जो उपस्थितों द्वारा ध्यानपूर्वक देखी गईं। आयोजकों ने कहा कि यह स्मृति दिवस न केवल अतीत की पैनापानी याद दिलाने का माध्यम है, बल्कि सामूहिक चेतना को जागरूक कर भविष्य में समान प्रवृत्तियों को रोकने के लिए भी प्रेरित करता है।



