कैराना

मां की ममता मलबे में दफन

सवा माह के मासूम से हमेशा के लिए बिछुड़ी शाहजहां, तीन मासूमों समेत पांच घायल

 दोपहर में चूल्हे पर बन रहा था खाना, निवाला मुंह तक पहुंचने से पहले उजड़ गया गरीब मजदूर का घर; एक माह पहले ही बेटे कैफ को दिया था जन्म, पूरे मोहल्ले में पसरा मातम

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।

कैराना। दोपहर का समय था। घर की रसोई में चूल्हे पर खाना पक रहा था। परिवार के सदस्य भोजन का इंतजार कर रहे थे। किसी को क्या पता था कि कुछ ही पल बाद यही घर अपनों की चीखों से गूंज उठेगा। अचानक बारिश से कमजोर हुई कच्ची छत भरभराकर गिर पड़ी और पूरा परिवार मलबे के नीचे दब गया। इस दर्दनाक हादसे में सवा माह पहले बेटे को जन्म देने वाली शाहजहां पत्नी मुस्तकीम की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके दो मासूम बच्चों सहित परिवार के पांच सदस्य घायल हो गए। हादसे के बाद पूरे मोहल्ले में मातम और चीख-पुकार का माहौल बन गया।

यह हृदयविदारक हादसा कस्बे के मोहल्ला दरबार खुर्द स्थित मजीद कॉलोनी में सोमवार दोपहर करीब 12 बजे हुआ। बताया जाता है कि लगातार हो रही बारिश के कारण मकान की कच्ची छत काफी कमजोर हो चुकी थी। परिवार के लोग दोपहर का भोजन तैयार कर रहे थे। शाहजहां अपने करीब सवा माह के नवजात बेटे कैफ को गोद में संभाल रही थी, जबकि दो वर्षीय बेटा सलमान भी उसके जिस्म से चिपका हुआ था। उसी मकान में शाहजहां का भाई इंतजार पुत्र वसीम, उसकी पत्नी नय्यर और उनका दूधमुंहा बेटा जैद भी मौजूद थे। इसी दौरान अचानक तेज आवाज के साथ पूरी कच्ची छत भरभराकर नीचे आ गिरी। देखते ही देखते पूरा कमरा मिट्टी, लकड़ी और मलबे से भर गया। घर के भीतर मौजूद सभी लोग उसके नीचे दब गए। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़ पड़े। मोहल्लेवासियों ने अपने हाथों से मिट्टी और मलबा हटाकर परिवार के सदस्यों को बाहर निकाला। हर कोई किसी तरह जान बचाने की कोशिश में जुटा था।घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने शाहजहां को मृत घोषित कर दिया। वहीं दो वर्षीय सलमान, नवजात कैफ, भाई इंतजार, भाभी नय्यर और उनका नवजात बेटा जैद घायल हो गए, जिनका उपचार जारी है। परिजनों ने बताया कि करीब चार वर्ष पहले शाहजहां का विवाह हरियाणा के करनाल जनपद के गांव नीलोखेड़ी निवासी मुस्तकीम के साथ हुआ था। करीब सवा माह पहले उसने मायके में बेटे कैफ को जन्म दिया था। प्रसव के बाद से वह अपने मायके में रह रही थी। संयोग यह भी रहा कि उसकी भाभी नय्यर ने भी इसी दौरान बेटे जैद को जन्म दिया था। दोनों जच्चाएं अपने-अपने नवजात बच्चों के साथ एक ही मकान में रह रही थीं। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि एक बारिश पूरे परिवार की खुशियां छीन लेगी। मृतका के पिता वसीम बेहद गरीब मजदूर हैं। वह सड़कों और गलियों से प्लास्टिक व अन्य कबाड़ बीनकर किसी तरह परिवार का गुजारा करते हैं।मेहनत-मजदूरी से चल रहे इस परिवार पर यह हादसा किसी पहाड़ से कम नहीं है। बेटी की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। घर के बाहर महिलाओं के विलाप और परिजनों की सिसकियों से माहौल गमगीन हो गया।

खाना अधूरा रह गया, घर में बिखर गया सामान

हादसे के बाद रसोई में चूल्हे पर रखा खाना अधूरा ही रह गया। बर्तन और घरेलू सामान मलबे में दब गया। जिस घर में कुछ देर बाद सभी लोग एक साथ बैठकर भोजन करने वाले थे, वहां कुछ ही क्षणों में चीख-पुकार और मातम छा गया। यह मंजर देखकर मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

पुलिस ने किया निरीक्षण, परिजनों से की जानकारी

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। हालांकि परिजनों ने किसी प्रकार की कानूनी कार्रवाई कराने से इनकार करते हुए शाहजहां के शव को बिना पोस्टमार्टम सुपुर्द-ए-खाक करने का निर्णय लिया। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे मोहल्ले को झकझोर कर रख दिया है और हर किसी की जुबान पर यही सवाल है कि यदि कच्चे मकानों की समय रहते मरम्मत हो जाती, तो शायद एक मां की जान बच सकती थी।

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