पिता-पुत्र दोहरे हत्याकांड में तीन को उम्रकैद, चौथे को पांच साल की सजा
कांधला के चर्चित मखमूलपुर हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला, चारों दोषियों पर 2.18 लाख रुपये का जुर्माना
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कैराना। रुपये के लेन-देन के विवाद में पिता-पुत्र की हत्या के करीब चार वर्ष पुराने चर्चित मामले में अदालत ने चार आरोपितों को दोषी करार देते हुए कड़ी सजा सुनाई है। तीन दोषियों विक्रान्त, अर्जुन और मोनू उर्फ विपिन को आजीवन कारावास, जबकि चौथे दोषी वीरेंद्र को पांच वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। अदालत ने सभी धाराओं में लगाए गए अर्थदंड समेत कुल 2.18 लाख रुपये के जुर्माने से भी दंडित किया है।
यह फैसला सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट, शामली की अदालत ने सुनाया। पुलिस की प्रभावी विवेचना और अभियोजन की मजबूत पैरवी के चलते चर्चित दोहरे हत्याकांड में दोषियों को सजा मिलने से पीड़ित परिवार को न्याय मिला है।
मामला पांच अप्रैल 2022 का है। मेरठ के कंकरखेड़ा क्षेत्र की रहने वाली सुदेश देवी अपने बेटे भूपेंद्र और पौत्र अर्जुन के साथ रुपये के लेन-देन से जुड़े विवाद को लेकर कांधला क्षेत्र के गांव मखमूलपुर पहुंची थीं। आरोप था कि वहां मौजूद सिपाही विक्रान्त, अर्जुन, मोनू उर्फ विपिन और वीरेंद्र ने भूपेंद्र और उनके बेटे अर्जुन को बंधक बना लिया। इसके बाद दोनों को गाड़ी में डालकर अपने साथ ले गए। आरोपितों ने दोनों की हत्या कर शवों को गांव सल्फा में फेंक दिया और मौके से फरार हो गए।
घटना से इलाके में सनसनी फैल गई थी। सुदेश देवी की तहरीर पर कांधला थाने में मुकदमा अपराध संख्या 116/2022 दर्ज किया गया था। मामले में कांधला पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों आरोपितों बर्खास्त सिपाही विक्रान्त, अर्जुन, मोनू उर्फ विपिन और वीरेंद्र को आठ और नौ अप्रैल 2022 को गिरफ्तार कर लिया था। विवेचना में सामने आया कि भूपेंद्र और विक्रान्त के बीच रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद चल रहा था। धनराशि वापस करने को लेकर विवाद बढ़ा और इसी के चलते पिता-पुत्र की हत्या की गई। पुलिस ने विवेचना पूरी कर 29 जून 2022 को आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था।
पुलिस की पैरवी से दोषियों पर कसा शिकंजा
उत्तर प्रदेश शासन के “ऑपरेशन कन्विक्शन” अभियान के तहत शामली पुलिस ने मामले में प्रभावी पैरवी और साक्ष्यों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराने पर जोर दिया। पुलिस अधीक्षक शामली एनपी सिंह के निर्देशन और अपर पुलिस अधीक्षक सुमित शुक्ला के मार्गदर्शन में प्रकरण की लगातार मॉनीटरिंग की गई।पुलिस और अभियोजन पक्ष के समन्वित प्रयासों के बाद अदालत ने चारों अभियुक्तों को दोषी मानते हुए सजा सुनाई।
किसे कितनी सजा?
विक्रान्त, अर्जुन और मोनू उर्फ विपिन को धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास और 30-30 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई। अर्थदंड न देने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
इन्हीं तीनों को धारा 364 के तहत 10-10 वर्ष सश्रम कारावास और 20-20 हजार रुपये अर्थदंड, धारा 201 के तहत पांच-पांच वर्ष सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड तथा धारा 342 के तहत एक-एक वर्ष कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। विक्रान्त और अर्जुन को आयुध अधिनियम की धारा 25 के तहत भी दो-दो वर्ष सश्रम कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई। वहीं, वीरेंद्र को धारा 364/109 के तहत पांच वर्ष सश्रम कारावास और 15 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड न देने पर चार माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
चार साल बाद आया फैसला, दोहरे हत्याकांड में न्याय
रुपयों के विवाद से शुरू हुआ मामला दो जिंदगियों की हत्या तक पहुंच गया था। करीब चार वर्ष तक चले न्यायिक घटनाक्रम के बाद अदालत के फैसले ने यह संदेश दिया है कि हत्या जैसे गंभीर अपराध में दोषियों को कानून के शिकंजे से बचना आसान नहीं है। शामली पुलिस ने भी अपराधियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई और न्यायालय में मजबूत पैरवी जारी रखने की बात कही है।

