बाराबंकी

रास्ता विवाद में पीड़ित परिवार ने उठाए गंभीर सवाल

'दबंगों पर मेहरबानी, फरियादी पर कार्रवाई', एसपी से लगाई न्याय की गुहार

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो 

अवैध निर्माण, मारपीट और पुलिस की निष्क्रियता के आरोप; नगर पालिका द्वारा निर्माण को अवैध बताए जाने का भी दावा, निष्पक्ष जांच की मांग
बाराबंकी। जनपद  में एक रास्ता एवं भूमि विवाद ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद कथित दबंगों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जा रही, जबकि उल्टा पीड़ित पक्ष को ही मुकदमों और पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। मामले में पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक सहित मुख्यमंत्री और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच एवं न्याय की मांग की है।ग्राम ओबरी निवासी चन्द्रकला यादव द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए प्रार्थना-पत्र के अनुसार, 26 जून 2026 को उनके घर में बच्चे के जन्मदिन के अवसर पर पूजा कार्यक्रम था। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद पड़ोसी पक्ष के कई लोग कथित रूप से उनके घर के सामने स्थित एकमात्र आवागमन मार्ग पर दीवार का निर्माण करने लगे। विरोध करने पर गाली-गलौज, मारपीट, घर में घुसकर हमला करने, सामान तोड़फोड़ करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है।पीड़िता का आरोप है कि विपक्षी पक्ष की स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ होने के कारण उसकी शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उनका कहना है कि कई बार नगर कोतवाली के चक्कर लगाने के बावजूद अब तक उनकी शिकायत पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके विपरीत, विपक्षी पक्ष की शिकायत पर पीड़ित परिवार के विरुद्ध ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जिससे परिवार स्वयं को न्याय के बजाय उत्पीड़न का शिकार बता रहा है।पीड़ित पक्ष का यह भी दावा है कि इस विवाद से संबंधित शिकायत पहले नगर पालिका में भी की गई थी। उनके अनुसार, नगर पालिका के अधिकारियों ने संबंधित निर्माण को अवैध बताया था, लेकिन इसके बावजूद आज तक न तो कथित अवैध निर्माण हटाया गया और न ही जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।इन आरोपों के बाद स्थानीय पुलिस और राजस्व विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। पीड़ित परिवार ने उच्च अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराई जाए, कथित अवैध निर्माण की जांच हो, दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि की जाए तथा जो भी दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।फिलहाल इस मामले में पुलिस और संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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