जामताड़ा
बीआरसी करमाटांड़ में दिव्यांग बच्चों के लिए सहायक उपकरण वितरण शिविर आयोजित
54 बच्चों को मिली नई उम्मीद

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
जामताड़ा/करमाटांड़ : प्रखंड संसाधन केंद्र (बीआरसी) करमाटांड़ में मंगलवार को एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया, जो दिव्यांग बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास साबित हुआ। एएलआईएमसीओ (ALIMCO) के सहयोग से आयोजित इस वितरण शिविर में प्रखंड के विभिन्न सरकारी विद्यालयों से आए कुल 54 दिव्यांग बच्चों के बीच उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरणों का वितरण किया गया।
उपकरणों से आसान होगा जीवन
शिविर में बच्चों की जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए उन्हें कैलीपर, श्रवण यंत्र (हियरिंग एड), ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर और टीएलएम (TLM) किट प्रदान किए गए। इन उपकरणों का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को न केवल शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है, बल्कि उन्हें दैनिक जीवन की गतिविधियों में भी सक्षम बनाना है।
इस अवसर पर रिसोर्स शिक्षक शशि शेखर ने कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन सहायक उपकरणों के मिलने से बच्चों की न केवल गतिशीलता बढ़ेगी, बल्कि उनकी आत्मनिर्भरता भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने कहा, “जब दिव्यांग बच्चों को आवश्यक साधन उपलब्ध होते हैं, तो वे अधिक आत्मविश्वास के साथ अपनी शिक्षा पूरी कर पाते हैं और समाज की मुख्यधारा में बराबरी से खड़े होने की दिशा में आगे बढ़ते हैं।”
अधिकारियों और अभिभावकों की उपस्थिति
कार्यक्रम को सफल बनाने में एएलआईएमसीओ की विशेषज्ञ टीम की अहम भूमिका रही। शिविर में एएलआईएमसीओ के पी एंड ओ (P&O) विशेषज्ञ धनंजय मंडल और रवि कुमार, डाटा मैन हर्ष कटिहार, ऑडियोलॉजिस्ट जी. के. सिंह तथा जिला डाटा ऑपरेटर राजेश कुमार ने सक्रिय भागीदारी निभाई। इन विशेषज्ञों ने बच्चों की शारीरिक जांच कर उन्हें उचित उपकरण प्रदान किए और उनके अभिभावकों को उपकरणों के रखरखाव के बारे में भी जानकारी दी।
शिविर में बड़ी संख्या में दिव्यांग बच्चों के अभिभावक, प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। अभिभावकों ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि इन उपकरणों के मिलने से अब उनके बच्चों को स्कूल आने-जाने और रोजमर्रा के काम करने में काफी आसानी होगी।
यह शिविर समावेशी शिक्षा के प्रति करमाटांड़ प्रखंड के संकल्प को दर्शाता है। सरकार और विभिन्न संस्थानों के इस तरह के प्रयास दिव्यांग बच्चों के सपनों को पंख देने और उन्हें समाज में सम्मानजनक स्थान दिलाने में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।


