नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
जामताड़ा : करमाटांड़ प्रखंड क्षेत्र में सावन के पावन महीने में शिव भक्तों की सेवा और कांवड़ यात्रा को सुगम बनाने के उद्देश्य से ‘विद्यासागर सेवा समिति’ ने इस वर्ष भी अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में समिति के सदस्यों ने विभिन्न ग्रामीण इलाकों का दौरा किया और आम जनमानस से निशुल्क ‘बोल बम’ और ‘डाक बम’ सेवा शिविर को सफल बनाने के लिए तन-मन-धन से सहयोग करने की अपील की।
सेवा और समर्पण की भावना
विद्यासागर सेवा समिति प्रतिवर्ष सावन के दौरान सड़क मार्ग से गुजरने वाले हजारों कांवड़ियों के लिए विश्राम, चिकित्सा, भोजन और जलपान की निशुल्क व्यवस्था करती है। समिति के पदाधिकारियों का मानना है कि ‘जन सेवा ही ईश्वर सेवा है’। इसी भाव को चरितार्थ करने के लिए, समिति के स्वयंसेवकों ने हाल ही में क्षेत्र के कई गांवों का सघन दौरा किया। उन्होंने ग्रामीणों के साथ बैठकें की और उन्हें समिति द्वारा चलाई जा रही सेवा गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
ग्रामीणों से व्यापक जन-सहयोग की अपील
गाँव-गाँव जाकर समिति के प्रतिनिधियों ने लोगों से आग्रह किया कि वे इस धार्मिक और सामाजिक कार्य में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। उन्होंने अपील की कि जो भी भक्त या ग्रामीण सेवा शिविर में अपना योगदान देना चाहते हैं, वे स्वेच्छा से सामग्री (जैसे- खाद्य सामग्री, दवाइयां, फल आदि) या श्रमदान के माध्यम से मदद कर सकते हैं।
समिति के अध्यक्ष ने कहा, “यह सेवा कार्य केवल समिति का नहीं, बल्कि पूरे समाज का है। जब हर व्यक्ति एक छोटी सी मदद के लिए आगे आता है, तो एक बहुत बड़ा सेवा कार्य संपन्न होता है। कांवड़ियों की सेवा करना पुण्य का कार्य है और हम चाहते हैं कि इस बार का शिविर और भी अधिक व्यवस्थित और व्यापक हो।”
शिविर की तैयारी
ग्रामीणों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद समिति का उत्साह दोगुना हो गया है। समिति ने घोषणा की है कि आने वाले दिनों में शिविर स्थल का चयन और तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा। शिविर में कांवड़ियों के पैरों की मालिश, छाले के उपचार के लिए चिकित्सा सहायता, और चौबीसों घंटे शुद्ध पेयजल व सात्विक भोजन की व्यवस्था रहेगी।
विद्यासागर सेवा समिति का यह प्रयास न केवल कांवड़ियों की यात्रा को आसान बनाएगा, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आपसी भाईचारे और सेवा भाव को भी मजबूत करने का काम कर रहा है। समिति ने उन सभी का अग्रिम धन्यवाद दिया है जो इस सेवा यज्ञ में अपनी आहुति देने के लिए तत्पर हैं।



