टीबी उन्मूलन में उत्तर प्रदेश बना देश का अग्रणी राज्य
एम्स गोरखपुर में तकनीकी संगोष्ठी आयोजित

अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष बोले— नवाचार, प्रौद्योगिकी, साझेदारी और जनभागीदारी से ही टीबी मुक्त होगा उत्तर प्रदेश
नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
गोरखपुर : एम्स गोरखपुर में मंगलवार को उत्तर प्रदेश में टीबी उन्मूलन को लेकर एक उच्चस्तरीय तकनीकी संगोष्ठी (टेक्निकल कॉन्क्लेव) का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में राज्य स्वास्थ्य विभाग, राज्य क्षय रोग (टीबी) कार्यालय, एम्स गोरखपुर, निजी स्वास्थ्य क्षेत्र, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामुदायिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लेते हुए प्रदेश में टीबी उन्मूलन अभियान की प्रगति की समीक्षा की और भविष्य की रणनीति पर मंथन किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष (आईएएस) ने कहा कि “नवाचार, प्रौद्योगिकी, साझेदारी और जनभागीदारी उत्तर प्रदेश की टीबी उन्मूलन यात्रा के मूल आधार हैं।” उन्होंने कहा कि अब केवल लक्षण आधारित जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि शीघ्र पहचान, त्वरित निदान, समय पर उपचार और जोखिम आधारित सक्रिय सर्विलांस को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का दायित्व नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत उत्तर प्रदेश ने 31 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर 1.85 लाख नए टीबी मरीजों की पहचान की, जबकि करीब 52 हजार बिना लक्षण वाले टीबी रोगियों का भी पता लगाया। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ उत्तर प्रदेश देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य बनकर उभरा है।
उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान प्रदेश के 26,722 उच्च जोखिम वाले गांवों में से 25,073 गांवों को कवर किया गया। वहीं 308 कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित हैंडहेल्ड एक्स-रे मशीनों की मदद से 30.4 लाख छाती के एक्स-रे किए गए, जो निर्धारित लक्ष्य का 111 प्रतिशत है। इसके अलावा 1,414 एनएएटी जांच केंद्रों के माध्यम से 8.19 लाख पंजीकृत व्यक्तियों में से 7.52 लाख लोगों की जांच की गई।
एम्स गोरखपुर की कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी मेजर जनरल (डॉ.) विभा दत्ता, एसएम (सेवानिवृत्त) ने कहा कि एम्स गोरखपुर टीबी उन्मूलन अभियान में राज्य सरकार का पूर्ण सहयोगी है। संस्थान उन्नत चिकित्सा सेवाओं, अनुसंधान और आधुनिक तकनीक के माध्यम से शीघ्र पहचान, बेहतर उपचार और रोगियों के उत्कृष्ट परिणाम सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।
संगोष्ठी में 60 से अधिक विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें पद्मश्री डॉ. राजेंद्र प्रसाद, केजीएमयू लखनऊ के श्वसन रोग विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) सूर्यकांत त्रिपाठी सहित देशभर के वरिष्ठ चिकित्सक, जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ, शोधकर्ता और विकास सहयोगी शामिल रहे। सभी विशेषज्ञों ने टीबी उन्मूलन अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपने अनुभव और सुझाव साझा किए।
कार्यक्रम के दौरान निदान, उपचार, निजी क्षेत्र की भागीदारी और सामुदायिक जनसहभागिता जैसे चार प्रमुख विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों से प्राप्त सुझावों और अनुशंसाओं को समापन सत्र में प्रस्तुत किया गया।
संयुक्त निदेशक (टीबी), राज्य क्षय रोग अधिकारी एवं चेस्ट विशेषज्ञ डॉ. ऋषि कुमार सक्सेना ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश के टीबी उन्मूलन अभियान का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने बताया कि 24 मार्च 2026 से शुरू हुए 100-दिवसीय टीबी मुक्त भारत अभियान 2.0 ने प्रदेश में टीबी नियंत्रण कार्यक्रम को नई गति दी है।
उन्होंने जानकारी दी कि जनवरी से जून 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में 3.37 लाख टीबी रोगियों की अधिसूचना (नोटिफिकेशन) दर्ज की गई, जो वार्षिक सात लाख के लक्ष्य का 48 प्रतिशत तथा निर्धारित आनुपातिक लक्ष्य का 96 प्रतिशत है। उन्होंने इसे राज्य की प्रभावी स्वास्थ्य व्यवस्था, मजबूत निगरानी तंत्र और जनभागीदारी का परिणाम बताया।




