गाजियाबाद

संविधानिक दायित्वों के पालन और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर राष्ट्रपति व मुख्य न्यायाधीश के नाम भेजा जनहित ज्ञापन

नेशनल प्रेस टाइम्स,ब्यूरो।
लोनी/गाजियाबाद :  लोनी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एवं अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार ने संविधान प्रदत्त शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, समान अवसर और मौलिक अधिकारों के प्रभावी संरक्षण की मांग को लेकर महामहिम राष्ट्रपति, भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य संवैधानिक प्राधिकारियों के नाम एक विस्तृत जनहित ज्ञापन गाजियाबाद के माध्यम से भेजा गया।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, स्वतंत्रता, गरिमापूर्ण जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और विधि के समक्ष समान संरक्षण का अधिकार प्रदान करता है। इसके बावजूद शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, प्रश्नपत्र लीक और सार्वजनिक संस्थानों की गुणवत्ता को लेकर लगातार गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं, जिन पर प्रभावी और जवाबदेह कार्रवाई आवश्यक है।

ज्ञापन में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई तथा परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनाने की मांग की गई है। साथ ही सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, सरकारी भर्तियों में समान अवसर और पारदर्शिता सुनिश्चित करने तथा केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार से जुड़े संवैधानिक दायित्वों पर समयबद्ध कार्ययोजना लागू करने की मांग भी उठाई गई।
अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार ने अपने ज्ञापन में यह भी कहा कि शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आंदोलनों में भाग लेने वाले नागरिकों के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण किया जाना चाहिए। उन्होंने जंतर-मंतर पर विभिन्न संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा चलाए जा रहे आंदोलनों का उल्लेख करते हुए संबंधित विषयों पर संवैधानिक संस्थाओं से आवश्यक संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि किसी विभाग, मंत्रालय अथवा सार्वजनिक प्राधिकरण के संबंध में गंभीर प्रशासनिक या संवैधानिक विफलताओं के पर्याप्त तथ्य सामने आते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और प्रचलित कानूनों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, यदि किसी मंत्री के संबंध में संवैधानिक या प्रशासनिक उत्तरदायित्व के पालन का प्रश्न उत्पन्न होता है, तो उस पर संविधान एवं संसदीय परंपराओं के अनुरूप विचार किए जाने की मांग की गई है।
इस जनहित ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा भारत सरकार के कैबिनेट सचिव को भी प्रेषित की गई है। अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार ने कहा कि संविधान सर्वोच्च है और शासन के सभी अंगों का दायित्व है कि वे प्रत्येक नागरिक के शिक्षा, स्वास्थ्य, समान अवसर, गरिमापूर्ण जीवन और न्याय संबंधी अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करें।
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