झुंझुनू
अरावली चेतना संस्थान ने अरावली सर्वेक्षण टीम की लापरवाही को लेकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
झुंझुनूं। अरावली चेतना संस्थान ने अरावली सर्वेक्षण टीम की लापरवाही को लेकर उपखंड अधिकारी के पीए को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में लिखा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार द्वारा गठित अरावली सर्वेक्षण हाई पावर्ड जांच कमेटी द्वारा 7 से 10 अगस्त के सर्वे टाइम के दौरान उदयपुरवाटी क्षेत्र में किसी तरह की टीम का नहीं आना अरावली क्षेत्र के संरक्षण पर गम्भीर सवाल उठता हैं। इस पर सरकार निष्पक्ष जांच करवाएं कि आखिर ये जाच कमेटी केवल कागजी खानापूर्ति करके ही कैसे अरावली क्षेत्र का संरक्षण कर पाएगी। अरावली सिर्फ पहाड़ नहीं राजस्थान में वर्षा की सबसे बड़ी उम्मीद है। इसके सीने में लगातार हो रहा अवैध खनन व अवैध वसूली कर रहे वन विभाग के कुछ कर्मचारी अधिकारी भी इसके सीने को चीरकर, संरक्षण के दुश्मन बने हुए हैं। यदि इन्हें प्रभावी तरीके से नहीं रोका गया तो प्रदेश में गम्भीर पेयजल बैंक व पर्यावरण संकट उत्पन्न हो सकता है। इसलिए इस क्षेत्र के हर गांव का हर छोटी-बड़ी पर्वत श्रृंखला का सर्वे करके,अरावली पहाड़ी माना जाए। अरावली चेतना संस्थान सेवा समिति के संयोजक एडवोकेट के के सैनी ने अरावली खनन को लेकर गठित कमेटी पर गम्भीर सवाल उठाए हैं। सैनी ने कहा कि अरावली जैसी संवेदनशील छोटी बड़ी सभी पर्वतमालाओ का भविष्य विशेषज्ञों के बजाय कनिष्ठ अधिकारियों के भरोसे नहीं छोडा जा सकता है। अरावली चेतना संस्थान के अध्यक्ष मोहन लाल ने अरावली की नई परिभाषा को लेकर कमेटी को गम्भीर आपत्तियां भेजी है। जो अरावली के स्वरूप और वितरण को प्रभावित करती है। इसके क्षरण से जलग्रहण क्षेत्र अत्यधिक प्रभावित होंगे और नदियों के सूखने की रफ्तार बढ़ेगी।
जिससे इसके इर्द-गिर्द बसें लोगों की आजीविका व पर्यावरण संरक्षण को गम्भीर खतरा हो सकता है।
एडवोकेट हंसराज कबीर ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित हाई पावर्ड कमेटी ने 10 अगस्त तक फॉरेस्ट सर्वे आफ इंडिया के अनुसार 5 राज्यों के कुल 64 जिलों में से मात्र 10 जिलो के कुछ हिस्सों दिल्ली, गुरू ग्राम, कोटपूतली, जयपुर व उदयपुर में ही चंद समय का फिल्ड वीजिट किया है। जो घोर निंदनीय तो है ही एवं लापरवाही भरा कदम है।अरावली चेतना संस्थान सेवा समिति के संयोजक के के सैनी ने वेस्टर्न घट्स एक्सपर्ट पैनल की तर्ज पर नये सिरे से सभी 64 जिलों में ग्राम स्तर तक आमने-सामने जनपरामर्श करके समस्त छोटी बड़ी पर्वत श्रृंखलाओं को अरावली की परिभाषा में तय करने की पुरजोर मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री से ज्ञापन पत्र देकर मांग की है कि सर्वैक्षण टीम द्वारा अनदेखी कर मनमानीपूर्ण रिपोर्ट की जांच करवाकर लापरवाही कर्मचारी अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए जनभावना व इसके इर्द-गिर्द बसें लोगों की मूलभूत सुविधाओं और आजीविका को ध्यान में रखते हुए छोटी बड़ी सभी पहाड़ियों को अरावली पर्वत श्रृंखलाओं में शामिल कर राज्य स्तर पर अरावली संरक्षण कानून बनाने की पूरजोर मांग की है।इस दौरान उदयपुरवाटी पीडब्ल्यूडी संघर्ष समिति अध्यक्ष सुबेदार बुद्धराम बजावा,ब्लाक अध्यक्ष हंसा वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष सीता राम,सचिव भूरा राम ,मोहन लाल ,भागीरथ,अशोक,मनीष, सुभाष, प्रदीप आदि मुख्य मुख्य लोग उपस्थित रहे।



