गाजियाबाद
तिरंगा यात्रा लोनी में भीड़ के दावों पर उठे सवाल
मंत्री ए.के. शर्मा ने आम जनता से क्यों बनाई दूरी?

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : भाजपा की ओर से गुरुवार को खन्ना नगर मेन रोड से रामफल वाटिका तक निकाली गई तिरंगा यात्रा को पार्टी की ओर से सफल बताते हुए करीब 10 हजार लोगों की भागीदारी का दावा किया गया। हालांकि, मौके की तस्वीरों और कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच इस दावे को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यात्रा में भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे, नगरपालिका के कर्मचारी शामिल रहे, जबकि आम नागरिकों की अपेक्षित भागीदारी नजर नहीं आई।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे और हरी झंडी दिखाकर तिरंगा यात्रा को रवाना किया। भाजपा जिलाध्यक्ष चौधरी चैनपाल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में पार्टी नेताओं ने तिरंगे को राष्ट्रीय अस्मिता, अखंडता और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का प्रतीक बताते हुए ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
मंत्री ए.के. शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि तिरंगा देश के 140 करोड़ नागरिकों के आन, बान और शान तथा स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का प्रतीक है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘हर घर तिरंगा’ और ‘तिरंगा यात्रा’ को जन-आंदोलन बताते हुए विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील की।
भाजपा के दावे और जमीनी तस्वीर पर सवाल
भाजपा की ओर से यात्रा में करीब 10 हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया गया है। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यक्रम में नगरपालिका, स्कूली बच्चों और भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं की मौजूदगी प्रमुख रूप से दिखाई दी। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि स्कूली बच्चों की संख्या को अलग कर दिया जाए तो क्या पार्टी पदाधिकारी अपने स्तर पर दावा की गई भीड़ जुटा पाते?
यात्रा के दौरान जगह-जगह पुष्प वर्षा और स्वागत किए जाने की बात भी प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है, लेकिन इसके बावजूद कार्यक्रम में आम जनता की अपेक्षित भागीदारी को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है।
मंत्री ने आम जनता से क्यों बनाई दूरी?
कार्यक्रम से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि लोनी की स्थानीय समस्याओं—जलभराव, खराब सड़कों, बिजली कटौती और अन्य नागरिक सुविधाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं के बीच मंत्री ए.के. शर्मा ने आम नागरिकों के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनने से दूरी क्यों बनाए रखी?
स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि यदि तिरंगा यात्रा का उद्देश्य इसे जन-आंदोलन बनाना है, तो फिर आम जनता से संवाद क्यों नहीं हुआ? क्या मंत्री ने रास्ते में लोगों से उनकी समस्याएं जानने की कोशिश की? क्या स्थानीय नागरिकों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया?
हालांकि, विधायक के विकास के दावों के बीच स्थानीय नागरिकों की समस्याएं भी लगातार चर्चा में हैं। ऐसे में अब देखना होगा कि आने वाले समय में सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि इन समस्याओं के समाधान को लेकर कितनी गंभीरता दिखाते हैं।
कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश एवं जिला पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों, स्कूली बच्चों, एनसीसी कैडेट और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी रही।
अब सवाल भाजपा से है—क्या तिरंगा यात्रा वास्तव में आम जनता का जन-आंदोलन थी या पार्टी संगठन की भीड़ तक सीमित एक राजनीतिक कार्यक्रम? और यदि यह जन-आंदोलन था तो मंत्री ए.के. शर्मा ने लोनी की जनता से सीधे संवाद क्यों नहीं किया? जबकि स्थानीय उनसे मिलकर बिजली की अघोषित विद्युत आपूर्ति व अन्य समस्या की जानकारी देकर उनसे इसका निस्तारण करने की मांग करना चाहती थी लेकिन पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं ने जनता को इन समस्याओ को उठाने का अवसर ही नहीं दिया।इन सवालों के जवाब अब स्थानीय जनता तलाश रही है।


