नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : तहसील लोनी में न्यायालयों की स्थापना को लेकर चल रही कवायद को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश से नई दिशा मिली है। हाईकोर्ट ने न्यायालयों के निर्माण के लिए प्रस्तावित भूमि को उपयुक्त माना है और संबंधित अधिकारियों को आगे की कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर करने की उम्मीद जताई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने जनहित याचिका संख्या 1576/2026 की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। याचिका में तहसील लोनी, जनपद गाजियाबाद में न्यायालय स्थापित किए जाने की मांग की गई थी।
अदालत को बताया गया कि न्यायालयों की स्थापना के संबंध में पूर्व में प्रस्ताव तैयार किए गए थे, लेकिन उपयुक्त भूमि उपलब्ध न होने के कारण उन पर आगे कार्रवाई नहीं हो पा रही थी। पहले उपलब्ध कराई गई भूमि को एक चरण में न्यायालयों की स्थापना के लिए अनुपयुक्त पाया गया था। इसके बाद जिलाधिकारी से वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने के संबंध में संपर्क किया गया।
बाद में एसडीएम लोनी ने अवगत कराया कि पूर्व में प्रस्तावित भूमि ही उपलब्ध उपयुक्त भूमि है और उसका दोबारा परीक्षण किया जाना आवश्यक है। इसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर सब-कमेटी के चेयरमैन/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, कोर्ट संख्या-3, गाजियाबाद ने अधिकारियों के साथ स्थल का निरीक्षण किया। 12 अगस्त 2026 को प्रस्तुत रिपोर्ट में भूमि को न्यायालयों की स्थापना के लिए उपयुक्त बताया गया। इसके आधार पर जिला जज ने आगे की कार्रवाई किए जाने की राय दी।
हाईकोर्ट ने कहा कि अब इंफ्रास्ट्रक्चर सब-कमेटी और जिला जज द्वारा भूमि को उपयुक्त पाए जाने के बाद न्यायालयों के निर्माण एवं स्थापना के लिए हाईकोर्ट को नया प्रस्ताव भेजा जाना है। अदालत ने उम्मीद जताई कि इस मामले में निर्णय प्राथमिकता के आधार पर लिया जाएगा। इसके साथ ही जनहित याचिका का निस्तारण कर दिया गया। आदेश 13 अगस्त 2026 को पारित किया गया।
लोनी में न्यायालयों की स्थापना की उम्मीद बढ़ी
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद लोनी तहसील में न्यायालयों की स्थापना की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद जगी है। अब नए प्रस्ताव के हाईकोर्ट पहुंचने और उस पर निर्णय होने के बाद निर्माण एवं न्यायालयों की स्थापना की दिशा में अगली कार्रवाई हो सकेगी।



