बालाघाट
भारी बारिश में भी नहीं डगमगाए कदम, मजदूरों ने दिया धरना
बस स्टैंड से कलेक्टर कार्यालय तक निकाली रैली, जमकर की नारेबाजी

एकदिवसीय धरना देकर सरकार के खिलाफ जताया आक्रोश
57 सूत्रीय मांगों के निराकरण की मांग
मांगें पूरी ना होने पर भारतीय मजदूर संघ ने दी उग्र आंदोलन की चेतावनी
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
बालाघाट(म0प्र0) : श्रमिकों और कर्मचारियों की विभिन्न लंबित मांगों को लेकर भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर सोमवार को नगर में मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन किया। मजदूरों ने बस स्टैंड परिसर में एकदिवसीय धरना दिया। इसके बाद नगर में रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया और शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में श्रमिक, कर्मचारी एवं संघ से जुड़े पदाधिकारी मौजूद रहे। मजदूरों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी जायज मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया तो आंदोलन को और व्यापक करते हुए उग्र आंदोलन किया जाएगा।
बस स्टैंड से निकली रैली, कलेक्टर कार्यालय का घेराव
धरने के बाद मजदूरों ने बस स्टैंड से रैली निकाली। हाथों में मांगों से संबंधित तख्तियां और झंडे लेकर श्रमिक नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। इस दौरान श्रमिकों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने घेराव करते हुए शासन के नाम ज्ञापन सौंपा और लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की।
57 सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार से आर-पार की लड़ाई का संकेत
भारतीय मजदूर संघ के ज्ञापन में श्रमिकों और कर्मचारियों से जुड़ी कुल 57 प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें आउटसोर्स कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से लेकर दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण, कृषि मजदूरों, प्रवासी श्रमिकों, अतिथि शिक्षकों, संविदा कर्मचारियों, परिवहन क्षेत्र के चालक-परिचालकों, प्लेटफार्म एवं गिग वर्कर्स, राज्य कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, पंचायत सचिवों, स्वास्थ्य कर्मचारियों, बिजली कंपनियों के आउटसोर्स कर्मचारियों, पटवारियों, कोटवारों और नगरीय निकायों के कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
इन मांगों को पूरा करने की लगाई गुहार
भारतीय मजदूर संघ ने मांग की है कि विभिन्न विभागों में वर्षों से कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए ठोस नीति अथवा निगम-मंडल बनाया जाए तथा उन्हें 62 वर्ष की आयु तक सामाजिक सुरक्षा, उचित वेतन और श्रम कानूनों का लाभ दिया जाए। 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके दैनिक वेतनभोगियों को नियमित, विनियमित अथवा स्थायी कर्मी घोषित कर अनुकंपा, उपादान, अवकाश नगदीकरण और वेतनमान सहित सभी हितलाभ देने की मांग की गई है। नगर पालिका और नगर परिषद में वर्षों से कार्यरत सफाई कर्मचारियों एवं दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करने, औद्योगिक सुरक्षा मानकों का पालन कराने तथा हर माह नियमित वेतन भुगतान सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है। कृषि विभाग में पूर्व में कार्यरत किसान मित्र-दीदी की पुन: सेवा बहाली, मंडियों में तुलावटियों एवं हम्मालों को उचित पारिश्रमिक तथा संबल योजना का लाभ दिलाने की मांग रखी गई है।
प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों की सामाजिक सुरक्षा के लिए मध्यप्रदेश राज्य प्रवासी श्रमिक आयोग का पुनर्गठन, अतिथि शिक्षकों की सेवा 62 वर्ष तक जारी रखने तथा लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को अनुभव का लाभ देने की मांग की गई है। मिड-डे मील योजना के रसोइयों का मानदेय बढ़ाने और उन्हें ईपीएफ-पेंशन सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।संविदा कर्मचारियों के लिए संविदा नीति 2023 को सभी विभागों में लागू करने, अनुकंपा, ग्रेच्युटी, एनपीएस और नियमित कर्मचारियों के समान अवकाश सहित अन्य सुविधाएं देने तथा लंबे समय से कार्यरत संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग की गई है। परिवहन क्षेत्र में चालक-परिचालक बोर्ड के पुनर्गठन और प्लेटफार्म एवं गिग वर्कर्स के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुख है।राज्य कर्मचारियों के वेतन, ग्रेच्युटी और स्वास्थ्य बीमा से जुड़े मुद्दों के निराकरण, महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सुपरवाइजरों को पदोन्नति के अवसर, पंचायत सचिवों को समयमान वेतनमान, आयुष्मान योजना एवं बीमा का लाभ तथा रोजगार सहायकों को जिला संवर्ग में शामिल करने की मांग भी उठाई गई है।स्वास्थ्य विभाग में फार्मासिस्टों की भर्ती, वेतनमान और पदोन्नति संबंधी नियम लागू करने, आशा कार्यकर्ताओं एवं सुपरवाइजरों के मानदेय में वृद्धि और सेवा अवधि 62 वर्ष तक करने की मांग की गई है। बिजली कंपनियों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को अनुभव के आधार पर भर्ती में प्राथमिकता, जोखिम भत्ता और कंपनी से सीधे वेतन भुगतान की मांग भी ज्ञापन में रखी गई है।
इसके अलावा पटवारियों के वेतनमान एवं कैडर रिव्यू, कोटवारों के मानदेय में वृद्धि, भवन एवं संनिर्माण कर्मकार मंडल की योजनाओं में लाभ की बाध्यताएं समाप्त करने तथा नगरीय निकायों में वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी और 29 दिवसीय कर्मचारियों को नियमित/विनियमित करने की मांग की गई है।
मांगें नहीं मानी तो आंदोलन होगा तेज
धरने के दौरान श्रमिक नेताओं ने कहा कि सरकार को श्रमिकों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध तरीके से निराकरण करना चाहिए। मजदूरों ने चेतावनी दी कि यदि ज्ञापन में शामिल मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन किया जाएगा।भारतीय मजदूर संघ ने ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से श्रमिकों एवं कर्मचारियों की जायज मांगों पर शीघ्र विचार कर उचित निर्णय लेने की अपील की है।
वर्षो से लगा रहे गुहार नही हो रही सुनवाई
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि प्रदेश के संगठित और असंगठित क्षेत्र, शासकीय एवं निजी उद्योगों में कार्यरत नियमित, संविदा, आउटसोर्स, दैनिक वेतनभोगी, अंशकालीन श्रमिकों, कर्मचारियों तथा पेंशनरों की अनेक मांगें लंबे समय से लंबित हैं। भारतीय मजदूर संघ द्वारा पूर्व में भी शासन को ज्ञापन सौंपकर इन समस्याओं के निराकरण की मांग की गई थी, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण श्रमिकों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
तो प्रदेश सहित पूरे देश मे होगा उग्र आंदोलन -योगेश
भारतीय मजदूर संघ जिलाध्यक्ष योगेश यादव ने बताया कि केन्द्र और प्रदेश की सरकार, श्रमिकों का आर्थिक शोषण और उनकी अनदेखी कर रही है। सरकार, देश के श्रमिकों को नियमित ना करके, आउटसोर्स और संविदा जैसी नीतियों के तहत भर्ती कर उन्हें जैसा काम वैसा दाम ना देकर उन्हें परेशान कर रही है। जिसके खिलाफ, देशव्यापी आंदोलन के तहत, सोमवार को भारतीय मजदूर संघ के ने धरना प्रदर्शन आंदोलन करके रैली निकाली और पीएम एवं सीएम के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है। जिसमें 57 सूत्रीय मांगो के निराकरण की मांग दोनो ही सरकारों से की गई है और यदि सरकार, संघ की दिए गए मांगपत्र पर गंभीरता से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती है तो आगामी समय में भारतीय मजदूर संघ उग्र आंदोलन करेगा। जिसकी जवाबदारी, केन्द्र और प्रदेश सरकार की होगी।




