एसडीएम के रोक आदेश के बावजूद दुकानें लगाने का आरोप, सरकारी रिसीवर की मांग
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
कांधला। रामलीला मैदान को लेकर चल रहे विवाद के बीच श्री रामलीला कमेटी कांधला (अपंजीकृत, कैलाशचंद्र गुट) के प्रबंधक माता शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कैराना रोड पर सार्वजनिक सड़क पर बिना अनुमति दुकानें लगाए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने जिलाधिकारी शामली से रामलीला मैदान और उससे जुड़ी व्यवस्था के लिए सरकारी रिसीवर नियुक्त करने की मांग की है।
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के अनुसार, 25 सितंबर 2026 को उपजिलाधिकारी कैराना ने थाना कांधला और नगर पालिका परिषद कांधला को निर्देश दिए थे कि सक्षम अनुमति के बिना रामलीला मैदान में मेले का आयोजन न होने दिया जाए। बिना अनुमति आयोजन या उसकी तैयारी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे। उनका आरोप है कि इसके बावजूद कैराना रोड पर सार्वजनिक आवागमन वाली सड़क पर दुकानें लगाई जा रही हैं, जिससे अतिक्रमण और यातायात में बाधा की स्थिति बन रही है।
उन्होंने प्रशासन से मौके पर जांच कर यह स्पष्ट कराने की मांग की है कि दुकानों के लिए कोई वैध अनुमति जारी हुई है या नहीं। बिना अनुमति दुकानें मिलने पर उन्हें हटाने और नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
1977-78 के न्यायालयीन आदेशों का हवाला
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कहा कि रामलीला मैदान और संबंधित भूमि को लेकर वर्ष 1977 और 1978 के न्यायालयीन आदेश मौजूद हैं। उनका दावा है कि संबंधित भूमि श्री रामलीला कमेटी कांधला (अपंजीकृत), कैलाशचंद्र गुट से संबंधित है और पंजीकृत संस्था के अधिकार को लेकर विवाद है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 से सितंबर 2026 तक इस मामले में विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर कार्रवाई होती रही है।
उन्होंने बताया कि 1977-78 के न्यायालयीन आदेशों और संबंधित अभिलेखों की प्रतियां एसडीएम कैराना, तहसीलदार कैराना, सीओ कैराना और थाना कांधला प्रभारी को उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। साथ ही, इलाहाबाद हाईकोर्ट में अवमानना याचिका संख्या 3003/2026 और 3027/2026 विचाराधीन होने की बात भी कही।
निष्पक्ष व्यवस्था के लिए रिसीवर की मांग
आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने जिलाधिकारी शामली से मांग की कि विवादित स्थिति को देखते हुए रामलीला मैदान की व्यवस्था के लिए सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से सरकारी रिसीवर नियुक्त किया जाए। उन्होंने कहा कि रिसीवर की देखरेख में रामलीला मंचन और मेला महोत्सव कराया जाए, जिससे धार्मिक परंपरा भी बनी रहे और किसी विवादित पक्ष को भूमि पर एकतरफा नियंत्रण न मिले।
उन्होंने प्रशासन से कैराना रोड से अवैध दुकानें और अतिक्रमण हटाने, राजस्व एवं नगर निकाय अधिकारियों से मौके की जांच और पैमाइश कराने तथा सभी न्यायालयीन एवं राजस्व अभिलेखों का परीक्षण करने की मांग की है।
अनुमति मिलने पर हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
उन्होंने कहा कि यदि एसडीएम के पूर्व आदेश और 1977-78 के न्यायालयीन आदेशों के बावजूद विवादित पंजीकृत संस्था अथवा किसी आवेदक को रामलीला आयोजन की अनुमति दी जाती है, तो उपलब्ध न्यायिक एवं प्रशासनिक अभिलेखों के आधार पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में आवश्यक अवमानना कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने प्रशासन से न्यायालयीन आदेशों का पालन सुनिश्चित करने और सार्वजनिक सड़क को अतिक्रमणमुक्त रखने की मांग की।



