
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
बरेली । श्री राधा माधव संकीर्तन मंडल के तत्वावधान में चल रही रासलीला एवं भक्त लीला के चौथे दिन शुक्रवार को श्री खाटू श्याम चरित्र लीला का मंचन किया गया। वृंदावन से पधारी स्वामी देवकीनंदन महाराज की मंडली ने लीला का सजीव प्रस्तुतीकरण किया।
महाराज जी ने बताया कि खाटू श्याम का नाम बर्बरीक था। वे पांडुपुत्र भीम और हिडिंबा के पौत्र तथा घटोत्कच और मोरवी के पुत्र थे। भगवान शिव और भगवती की तपस्या से उन्हें तीन दिव्य बाण प्राप्त हुए थे। महाभारत युद्ध के दौरान बर्बरीक ने प्रतिज्ञा ली थी कि जो पक्ष हारेगा, वह उसी की ओर से लड़ेगा। भगवान कृष्ण को इसका पता चला तो उन्होंने ब्राह्मण वेश में बर्बरीक की परीक्षा ली। बर्बरीक ने कहा कि वह एक तीर से पूरे युद्ध का निर्णय बदल सकते हैं। परीक्षा में उन्होंने एक ही तीर से पेड़ के सभी पत्तों में छेद कर दिया, यहां तक कि कृष्ण के पैर के नीचे दबा पत्ता भी नहीं बचा। यह देख कृष्ण समझ गए कि यदि बर्बरीक युद्ध में शामिल हुए तो पांडव हार जाएंगे। तब उन्होंने दान में बर्बरीक से उनका शीश मांग लिया। बर्बरीक ने सहर्ष शीश दान दे दिया। प्रसन्न होकर कृष्ण ने वरदान दिया कि कलयुग में तुम खाटू श्याम के नाम से पूजे जाओगे। उनका शीश पर्वत पर स्थापित किया गया, जहां से उन्होंने पूरा युद्ध देखा। यही शीश कलयुग में राजस्थान के सीकर जिले के खाटू नगर में प्रकट हुआ, जहां आज भव्य मंदिर है।
मीडिया प्रभारी कैलाश चंद्र शर्मा ने बताया कि आज के यजमान विवेक शरण अग्रवाल, संजय गोयल और वीरेंद्र स्वरूप अग्रवाल रहे। इस दौरान जुगल किशोर साबू, मोहन गुप्ता, सुरेश मिन्ना, विकास शर्मा, कैलाश शर्मा, प्रेम शंकर अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, नवीन गोयल सहित अन्य सदस्यों का सहयोग रहा।




