गाजियाबाद

लोनी में डॉक्टरों से फर्जी महिला पत्रकार द्वारा अवैध उगाही का आरोप

पत्रकारिता की आड़ में वसूली के दावे से क्षेत्र में मचा हड़कंप

महिला पत्रकार और उसके साथियों पर क्लीनिक संचालकों को डराने-धमकाने के आरोप, पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में 
नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी, गाजियाबाद : लोनी क्षेत्र की नयी आबादी वाली आधा दर्जन से अधिक कॉलोनियों में संचालित निजी क्लीनिकों के कुछ डॉक्टरों से  अवैध उगाही किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक महिला, जो स्वयं को पत्रकार बताती है, अपने कुछ साथियों के साथ विभिन्न कॉलोनियों में स्थित क्लीनिकों पर पहुंचती है और वहां मौजूद डॉक्टरों से उनकी शैक्षणिक डिग्री तथा क्लीनिक संचालन से संबंधित दस्तावेजों के बारे में पूछताछ करती है। इसके बाद कथित तौर पर डॉक्टरों पर पत्रकारिता का रौब डालकर पैसे देने का दबाव बनाया जाता है।
सूत्रों के अनुसार, आशियाना सिटी, अमन गार्डन, निठोरा रोड, गढ़ी शबलू रोड सहित लोनी की कई कॉलोनियों में इस तरह की घटना होने की चर्चा है। कुछ डॉक्टरों के कथित तौर पर इस महिला और उसके साथियों के दबाव में आने की बात भी सामने आ रही है। आरोप यह भी है कि जो डॉक्टर पैसे देने से इनकार करते हैं, उनके खिलाफ पुलिस को फोन करने की बात कही जाती है और कई मामलों में पुलिस को मौके पर बुलाया जाता है।
पुलिस की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
सबसे गंभीर सवाल पुलिस की भूमिका को लेकर उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि सामान्य शिकायतों अथवा घटनाओं पर पुलिस के पहुंचने में समय लग जाता है, लेकिन कथित उगाही करने वाले समूह की ओर से फोन किए जाने पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच जाती है। आरोप है कि कुछ मामलों में पुलिस की मौजूदगी में कथित विवाद को पैसे के लेनदेन के बाद समाप्त करा दिया गया  यदि वास्तव में किसी डॉक्टर के खिलाफ चिकित्सा संबंधी अनियमितता की शिकायत होती है तो उसकी जांच संबंधित स्वास्थ्य विभाग अथवा उसके द्वारा गठित टीम द्वारा नियमानुसार की जानी चाहिए। इस सब के चलते अब सवाल उठ रहा है कि किसी पत्रकार को स्वयं डॉक्टरों की डिग्री जांचने अथवा जांच के नाम पर धन मांगने का अधिकार किसने दिया है।
पत्रकारिता की आड़ में उगाही करने का आरोप गंभीर,
पत्रकारिता लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ है और पत्रकारों का काम जनसमस्याओं तथा भ्रष्टाचार को सामने लाना है। यदि कोई व्यक्ति पत्रकार होने की पहचान का इस्तेमाल किसी व्यक्ति या संस्था को डराने-धमकाने अथवा आर्थिक लाभ लेने के लिए करता है तो यह न केवल गंभीर आरोप है बल्कि पूरे पत्रकारिता जगत की छवि को प्रभावित करता है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि उक्त महिला के संबंध मेरठ में पत्रकारिता से जुड़े किसी व्यक्ति से हैं। हालांकि इस संबंध और उसकी प्रकृति की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
निष्पक्ष जांच की मांग
अब सवाल यह है कि यदि वास्तव में डॉक्टरों से धन की मांग की गई और पुलिस को मौके पर बुलाकर कथित रूप से मामले को निपटाया गया, तो इसकी निष्पक्ष जांच  कराई जाए? पुलिस अधिकारियों को ऐसे मामलों में मौके पर पहुंचने वाले पुलिसकर्मियों की भूमिका की शिकायत और  लेनदेन और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज अथवा अन्य साक्ष्यों की जांच करनी चाहिए।
स्थानीय स्तर पर पत्रकारों के व्हाट्सएप ग्रुप पर मांग उठ रही है कि स्वास्थ्य विभाग भी क्षेत्र में बिना वैध पंजीकरण अथवा आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता के संचालित क्लीनिकों की नियमानुसार जांच करे। साथ ही यदि कोई व्यक्ति पत्रकारिता की पहचान का दुरुपयोग कर अवैध वसूली करता पाया जाता है तो उसके खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाए।
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