गाजियाबाद
यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज का आक्रोश
ठाकुर मनीष सिंह बोले,‘अधिकारों की आवाज उठाना अपराध नही

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो।
लोनी गाजियाबाद : यूजीसी से जुड़े प्रस्तावित कानून, आरक्षण व्यवस्था तथा एससी/एसटी कानून के दुरुपयोग को लेकर सवर्ण समाज में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। सवर्ण संसाधन समन्वय समिति (S4) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर मनीष सिंह ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपने अधिकारों और मांगों को लेकर आवाज उठाना किसी भी नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा सवर्ण समाज की आवाज को दबाने के लिए बल प्रयोग किया जाना ठीक नहीं है।
ठाकुर मनीष सिंह ने यूजीसी कानून का विरोध करते हुए कहा कि शिक्षा और उच्च शिक्षा से जुड़े किसी भी महत्वपूर्ण कानून को लागू करने से पहले उसके दूरगामी प्रभावों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी प्रस्तावित प्रावधान से विद्यार्थियों, शिक्षकों या समाज के किसी वर्ग के अधिकार प्रभावित होते हैं तो सरकार को उसे जल्दबाजी में लागू करने के बजाय संसद में विस्तार से चर्चा करानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था, एससी/एसटी कानून के कथित दुरुपयोग और यूजीसी से जुड़े कानूनों को लेकर सवर्ण समाज लंबे समय से अपनी आवाज उठाता रहा है। सरकार को सभी राजनीतिक दलों और संबंधित सामाजिक संगठनों को विश्वास में लेकर इन विषयों पर खुली चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जिन कानूनों या प्रावधानों के दुरुपयोग की शिकायतें खुलकर सामने आ रही हैं, उनकी जांच कर आवश्यक संशोधन किए जाएं।
सवर्ण समाज पर हुए कथित लाठीचार्ज को लेकर उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले लोगों के विरुद्ध पुलिस बल का इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित संदेश नहीं देता। उन्होंने कहा कि सरकार को विरोध करने वालों की बात सुननी चाहिए और बातचीत के माध्यम से इसका समाधान निकालना चाहिए।
ठाकुर मनीष सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में सवर्ण समाज अपनी समस्याओं और अधिकारों की लड़ाई स्वयं लड़ रहा है। उनके अनुसार विभिन्न राजनीतिक दलों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिलने के कारण समाज में राजनीतिक दलों के प्रति भी नाराजगी है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि 2027 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव में सवर्ण समाज अपने मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए राजनीतिक दलों के रुख का मूल्यांकन करेगा और लोकतांत्रिक तरीके से अपने मताधिकार के माध्यम से जवाब देगा।
उन्होंने सरकार से अपील की कि यूजीसी कानून सहित आरक्षण और एससी/एसटी कानून के कथित दुरुपयोग से जुड़े मुद्दों पर सभी दलों को साथ लेकर सदन में व्यापक चर्चा कराई जाए तथा समाज के विभिन्न वर्गों की चिंताओं का संवैधानिक और लोकतांत्रिक समाधान निकाला जाए।

