सरकारी स्कूल की बदहाली का वीडियो वायरल, आप नेता पर FIR से गरमाई सियासत
स्कूल की कथित अव्यवस्थाएं सोशल मीडिया पर उजागर करने पर कार्रवाई का आरोप, आप सांसद संजय सिंह ने सरकार पर उठाए सवाल

नेशनल प्रेस टाइम्स, ब्यूरो
हापुड़। सरकारी स्कूल की कथित बदहाल व्यवस्थाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में आम आदमी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सीएम चौहान के खिलाफ गाजियाबाद के भोजपुर थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
बताया जा रहा है कि सीएम चौहान ने एक सरकारी स्कूल का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर साझा किया था। वीडियो में स्कूल भवन की कथित खराब स्थिति, परिसर में शराब की बोतल मिलने तथा शिक्षकों और विद्यार्थियों की कथित गैरमौजूदगी जैसे मुद्दे उठाए गए थे। वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया और पुलिस ने सीएम चौहान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। आप सांसद संजय सिंह ने सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि यदि किसी सरकारी स्कूल की व्यवस्थाओं में खामियां हैं और उन्हें वीडियो के माध्यम से सामने लाया जाता है, तो उस पर कार्रवाई क्यों की गई। उन्होंने एफआईआर में स्टाफ से अभद्रता के लगाए गए आरोपों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
वहीं, सीएम चौहान ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वीडियो बनाने का उद्देश्य किसी कर्मचारी या शिक्षक को बदनाम करना नहीं था, बल्कि सरकारी स्कूल की वास्तविक स्थिति को सामने लाना था। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और स्कूल में मौजूद व्यवस्थाओं की सच्चाई सार्वजनिक करने की मांग की है।
इस घटनाक्रम के बाद सरकारी स्कूल परिसरों में बाहरी लोगों के प्रवेश, बिना अनुमति वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर संस्थानों से जुड़े वीडियो प्रसारित करने को लेकर भी बहस तेज हो गई है। एक ओर जहां आप नेता इसे व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर करने का प्रयास बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिस कार्रवाई को एफआईआर में लगाए गए आरोपों के संदर्भ में देखा जा रहा है।
अब मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जांच के दायरे में है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वीडियो में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और एफआईआर में लगाए गए आरोप किस हद तक सही साबित होते हैं। इस पूरे प्रकरण ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं, जवाबदेही और सोशल मीडिया पर जनप्रतिनिधियों एवं राजनीतिक नेताओं की भूमिका को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।



